अलविदा जुमा के दिन आयोजित इंटरनेशनल कुदस डे

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सीतापुर आज दिनाँक 31 मई 2019 को रमज़ान के मुबारक महीने के आख़िरी जुमे को जिसको जुमातुल विदा के नाम से जाना जाता है के मौक़े पर पुराने सीतापुर की बंगला शिया जामा मस्जिद मेँ नमाज़ ए जुमा के बाद एक इंटरनेशनल कुदस डे पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें फ़िलीस्तीन की ज़मीनों और मुसलमानों के सबसे पहले किब्ले जिसे बैतउल मुक़द्दस कहा जाता है , पर इस्राइल द्वारा अवैध रूप से किए गये  कब्ज़े और यमन ,  फ़िलीस्तीन , लीबिया , लेबनान , नाइजीरिया , सीरिया जैसे देशो मेँ  हो रहे ज़ुल्म और बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और ईसराईल और अमेरिका द्वारा दुनिया भर मेँ हो रहे ज़ुल्म की कड़ी निन्दा की । 

 

 

संगोष्ठी की शुरुआत जनाब उमम साहब ने क़ुरान शरीफ़ की तिलावत से की । उसके बाद जनाब रेज़म साहब ने एक तराना पेश किया जिसमें  फि़लिस्तीन की आज़ादी की दुआ की गयी । 

उसके बाद मदरसा जामिया अबुतालिब के प्राधानाचार्य एवं शिया जमात के पेश इमाम मौलाना इश्तियाक हुसैन साहब ने उपस्थित लोगों से अपील की के हम सबको उन मासूमों के हक़ मेँ आवाज़ उठाना ज़रूरी है जिनको निर्दोष होते हुए भी तबाह और बरबाद करके मारा जा रहा है । उन्होंने कहा के सँख्या मेँ कम होने से कोई मिशन कभी नाकामयाब नहीं होता बल्कि हक़ की लड़ाई हौसलों से लड़ी जाती है । जिस तरह करबला मेँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने मात्र 72 साथियों के साथ शहीद होकर भी उस वक़्त के बादशाह यज़ीद को और उसकी लाखों की फ़ौज को हरा दिया था जिसका नतीजा है के आज तक और क़यामत तक के लिए यज़ीद और उसके साथी मुर्दाबाद हो गये और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथी शहीद होने के बाद भी अमर हो गये । इसलिए याद रखो जहाँ जहाँ हक़ को दबाया जा रहा हो और तुम मौजूद हो तॊ उस हो रहे ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओ भले ही तुम अकेले क्यूँ न हो , क्यूँकि हक़ को परेशान किया जा सकता है मगर हराया नहीं जा सकता । 

 

संगोष्ठी मेँ डा. शुजाअत हैदर जाफ़री ने कहा के ज़रूरत है के हम अपनी तालीम और सोच पर ध्यान दें , क्यूँकि बिना अच्छी तालीम और तरबीयत के ,  बिना अच्छी सोच के हम कभी भी ताक़तवर नहीं बन सकते जिसके नतीजे मेँ कोई भी कभी भी कहीँ भी हमको नुकसान पहुँचा सकता है और हम बिना किसी मिशन के बन्द कमरों मेँ बैठ कर मोबाइल हाथ मेँ लिए गेम खेलते रहेंगे और सोशल मीडिया पर फ़ालतू की बहस मेँ वक़्त बरबाद करते रहेंगे , जोकि किसी भी क़ौम को तबाह और बरबाद करने के लिए काफ़ी है । 

अल उसवा इस्लामिक सेन्टर के सदर और मदरसा जामिया मुस्तफ़ा के प्राधानाचार्य  मौलाना हमीद उल हसन साहब ने इंटरनेशनल कुदस डे के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया की यदि हम मुसलमान इस बात मेँ यक़ीन रखते है के क़यामत से हमारे इमाम हज़रत मेंहदी इस दुनिया से अत्याचार और भ्रष्टाचार का खात्मा करेंगे और हम उनकी फौज के सिपाही होंगे तॊ यह ज़रूरी है के हम इस पूरी दुनिया मेँ हो रहे ज़ुल्म और शैतानियत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए और एक सच्चे सिपाही होने का सबूत दें । 

संगोष्ठी मेँ मोहसिन जाफ़री ,  मुजाहिद जाफ़री , सादिक़ रज़ा , अली इमाम , हसन इमाम , ज़फ़र अब्बास , मुहम्मद अब्बास शोले,शैजब अमान , कैफ़ , हसन काज़िम , इन्तेज़ार मेंहदी , यूसुफ़ हसनैन , कामिल , शादाब जाफ़री ,  मुहम्मद शादाब ,  अली मेंहदी ,  असकरी हैदर ,  फ़रीद मोहसिन इत्यादि क़रीब 150 आवाम के  लोग उपस्थित रहे । 

संगोष्ठी की अध्यक्षता जनाब रेज़म साहब ने की और अन्त मेँ संगोष्ठी के सफ़लता पूर्वक समापन हेतु उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया ।

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