अयोध्या मामले को सीधे बड़ी पीठ को भेजने से SC ने किया इनकार, 27 अप्रैल को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अयोध्या विवाद मामले को सीधे बड़ी पीठ को भेजने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला लेंगे कि इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

 

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बहुविवाह मामले को जब सीधे बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है तो राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को क्यों नहीं। क्या यह मामला बहुविवाह के मसले से कम है। पीठ को इसे स्पष्ट करना चाहिए। मुस्लिमों के लिए बहुविवाह से ज्यादा महत्वपूर्ण मामला अयोध्या विवाद है। पूरा देश इस पर जवाब चाहता है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई और करीब 45 मिनट तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला। तीन सदस्यीय पीठ के दखल के बाद दोनों पक्ष शांत हुए। 

दरअसल, मामले की सुनवाई शुरू होते ही सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने मुस्लिम पक्षकारों के वरिष्ठ वकील राजीव धवन से थोड़ा हटने के लिए कहा। इस पर धवन भड़क गए और दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सदस्य जस्टिस अशोक भूषण ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। धवन की एडिशनल सॉलिसिटर तुषार मेहता, पूर्व अटॉर्नी जनरल के. परासरन, हिंदू पक्षकार के वरिष्ठ वकील केएस वैद्यनाथ से भी गरमागरम बहस हुई। दोनों पक्षों को बड़ी मशक्कत के बाद पीठ ने शांत कराया। 

कोर्ट रूम ड्रामा
एएसजी मनिंदर सिंह से राजीव धवन : बकवास मत कीजिए।
मनिंदर : आप बकवास कर रहे हैं। यह बात करने का कौन सा तरीका है।
धवन : आप मुझे मत सिखाइए। बैठ जाइए मनिंदर सिंह, बैठ जाइए।
एएसजी तुषार मेहता (धवन से): कुछ लोग हैं, जो बेहद हठी हैं। ऐसा लगता है,धवन ने इस पर कोर्स किया हुआ है। अदालत में इस तरह कुछ करना चाहिए।
धवन: क्यों, क्या इसलिए कि आप खास हैं। आप सरकार की ओर से पैरवी करते हैं तो आप खास हो गए। आप बताइए, आपने कहां से कोर्स किया है।
मेहता: पहले मैं बार का सदस्य हूं। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कोर्ट में नहीं किया जाना चाहिए। अदालत का माहौल दूषित हो रहा है। अब वक्त आ गया है कि अदालत को कुछ करना चाहिए। 
वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ : मामला बड़ा है, इसका यह मतलब नहीं है कि वकील शिष्टाचार भूल जाएं।
धवन से जस्टिस अशोक भूषण : आप अपने केस पर बात कीजिए। इधर-उधर की बातें नहीं कीजिए।
धवन : मैं केस की बात करता है, इधर-उधर की बातें ये लोग करते हैं। 
वरिष्ठ वकील परासरन : धवन, केस से संबंधित बातें नहीं कर रहे हैं। कई मिनटों से यह ड्रामा चल रहा है।
धवन : मैं ड्रामा नहीं कर रहा हूं। मैं आपकी तरह नाटक नहीं करता। मुझे यह नहीं बताया जाए कि क्या बहस करनी है।
वैद्यनाथ : आखिर अदालत में किस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। 
धवन से जस्टिस भूषण : एक वरिष्ठ वकील से इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए आपको। आप अपनी बहस मीडिया को क्यों संबोधित कर रहे हैं।
धवन : क्यों, यह सभी को जानने का हक है। देश की जनता जानना चाहती है। प्रेस को अदालत की कार्यवाही सुनने का हक है, बशर्ते इन-कैमरा सुनवाई न हो।
धवन (हिंदू पक्षकारों और सरकारी वकीलों से): ये लोग क्यों बगल में खड़े हैं और क्यों खुसर-पुसर कर रहे हैं?
मेहता : आप हम लोगों के नजदीक क्यों खड़े हैं। दूसरी तरफ बहुत जगह है।

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