तेल कीमतों पर लगाम कसने भारत चीन साथ-साथ

कूटनीतिक तौर पर तो भारत और चीन के रिश्तों में लगातार तल्खी बढ़ रही है लेकिन कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे पर दोनों देशों न सिर्फ एक दूसरे के साथ हैं बल्कि मिल जुल कर तेल उत्पादक देशों पर दवाब भी बनाने में जुटे हैं। इसमें भारत और चीन के साथ दक्षिण कोरिया भी शामिल है।

तेल कीमतों पर लगाम कसने भारत चीन साथ-साथ

अप्रैल, 2018 में जब भारत में इंटरनेशनल इनर्जी फोरम (आइईएफ) की बैठक होगी तब इन तीनों देशों का संगठन तेल उत्पादक देशों पर इस बात के लिए दवाब बनाएंगे कि एशिया के सबसे बड़े तेल खरीददार देश होने के नाते उन्हें कीमत में थोड़ी राहत दी जाए। तीन देशों के बीच बन रहा यह गठबंधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ रही है और इसका असर इन तीनों देशों पर ही पड़ने के कयास लगाये जा रहे हैं।

अप्रैल, में आइईएफ की बैठक होने वाली है जो भारत में अंतरराष्ट्रीय तेल व गैस उत्पादक व उपभोक्ता देशों का अभी तक का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा। इस बैठक में 50 देशों के ऊर्जा मंत्री हिस्सा लेने जा रहे हैं। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान का कहना है कि पहली बार भारत में एक साथ 50 देशों के ऊर्जा मंत्री आ रहे हैं। इनमें से कई के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी जो आने वाले दिनों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित होगा। आइईएफ की बैठक में कुल 92 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया तीनों इस सम्मेलन के संयुक्त आयोजक है। ये तीनों देश मिल कर तेल कारोबार के मौजूदा स्वरूप को बदलने का मद्दा रखते हैं।

भारत, चीन और दक्षिण कोरिया न सिर्फ एशिया के तीन सबसे बड़े तेल खरीददार देश हैं बल्कि इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। दूसरी तरफ यूरोपीय देशों में तेल की मांग घट रही है जबकि अमेरिका ने अपना तेल निकालना शुरु कर दिया है। साथ ही अमेरिका में शेल गैस का उत्पादन भी तेजी से हो रहा है जिससे उसने तेल उत्पादक देशों से कम तेल खरीदना शुरु कर दिया है। ऐसे में सउदी अरब, ईरान, नाइजीरिया, कतर जैसे तमाम तेल उत्पादक देशों के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की अहमियत बहुत बढ़ गई है। 

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