
गर्मी में लोग ऐसा भोजन चाहते हैं, जो हल्का हो, शरीर को ठंडक दे और पाचन तंत्र पर ज्यादा भार भी न डाले। ऐसे मौसम में कर्ड राइस (दही चावल) स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है।
दक्षिण भारत की रसोई से निकला यह साधारण-सा व्यंजन आज पूरे देश में लोकप्रिय है। कम मसालों में तैयार होने वाला कर्ड राइस न केवल पेट को आराम देता है, बल्कि गर्मी से राहत पहुंचाने वाला भी है।
यह मौसम और शरीर की जरूरत के अनुसार विकसित हुई पारंपरिक खानपान शैली का हिस्सा है, बता रहे हैं हुरावल्ही आइलैंड रिजार्ट, मालदीव्स के शेफ सचिन राठौर।
परंपरा और इतिहास से जुड़ा व्यंजन
आयुर्वेद में दही को पाचन के लिए लाभकारी बताया गया है। दक्षिण भारत में यह रोजमर्रा की थाली का हिस्सा रहा है। खासतौर पर गर्म और उमस वाले इलाकों में लोग इसे शरीर को ठंडा रखने के लिए खाते हैं। कई दक्षिण भारतीय मंदिरों में इसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इसे सात्विक भोजन माना जाता है, क्योंकि यह हल्का, सरल और आसानी से पचने वाला होता है।
गर्मियों में क्यों है फायदेमंद?
दही की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे गैस, अपच और पेट में जलन से राहत मिल सकती है।
यही कारण है कि कई लोग मसालेदार भोजन के बाद दही चावल खाना पसंद करते हैं। दही में पानी की मात्रा भी अच्छी होती है, जिससे शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है। दही चावल देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन पोषण के लिहाज से संतुलित भोजन है। चावल शरीर को कार्बोहाइड्रेट देता है, जिससे ऊर्जा मिलती है। वहीं दही प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है।
भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसा भोजन चाहते हैं, जो जल्दी तैयार हो जाए और सेहत के लिए भी अच्छा हो। कर्ड राइस इस जरूरत पर पूरी तरह खरा उतरता है। आफिसगोअर्स, विद्यार्थी और बुजुर्ग सभी इसे आसानी से डाइट में शामिल कर सकते हैं। इंटरनेट मीडिया और फूड ब्लाग्स के दौर में भी दही चावल की लोकप्रियता बनी हुई है। कई शेफ और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे ‘कंफर्ट फूड’ की श्रेणी में रखते हैं।
अलग-अलग राज्यों में अलग स्वाद
तमिलनाडु में दही चावल को ‘थयिर साधम’, कर्नाटक में ‘मोसारन्ना’, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘पेरुगु अन्नम’ तथा केरल में ‘थयिर चोरू’ कहा जाता है। महाराष्ट्र और गुजरात में इसे दही भात के नाम से जाना जाता है। अलग-अलग नामों और स्वाद के बावजूद इसकी मूल पहचान एक ही है। तमिलनाडु में इसका स्वाद हल्का होता है, जबकि कर्नाटक में कभी-कभी इसमें अनार या अंगूर मिलाए जाते हैं।
आंध्र प्रदेश में लोग इसे थोड़ा तीखा बनाना पसंद करते हैं। ओडिशा में ‘दही पखाल’ नाम से प्रसिद्ध यह व्यंजन गर्मियों में काफी लोकप्रिय है। वहीं बंगाल में ‘दोई भात’ के रूप में इसे साधारण लेकिन आराम देने वाला भोजन माना जाता है।