
हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है, लेकिन जब यह चतुर्थी अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है, तो इसका महत्व सौ गुना बढ़ जाता है. इस साल अधिकमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वरदा विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाएगा. मान्यता के अनुसार, अधिकमास में की गई वरदा विनायक चतुर्थी की पूजा से साल भर की अन्य 12 चतुर्थियों से भी कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है. आइए जानते हैं इस साल वरदा चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि और नियमों के बारे मेंं.
क्या है वरदा विनायक चतुर्थी का महत्व ?
अधिकमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वरदा चतुर्थी कहा जाता है, जो भगवान गणेश को समर्पित होती है. धार्मिक ग्रंथ भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की उपासना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है. विशेष बात यह है कि अधिकमास में की गई यह पूजा सामान्य 12 महीनों की चतुर्थी से भी अधिक फलदायी मानी जाती है. जो श्रद्धालु इस व्रत को सच्चे मन से करते हैं, उन्हें धन, संतान, यश और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है.
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 मई को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, यह व्रत 20 मई को रखा जाएगा.इस व्रत का पूरा फल पाने के लिए विधि-विधान का पालन करना बेहद जरूरी है. सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पूजा में दूर्वा घास, मोदक, लड्डू, फल, फूल और सिंदूर अर्पित करें. भगवान गणेश को विशेष रूप से मोदक प्रिय होते हैं, इसलिए इसका भोग लगाना शुभ माना जाता है. इसके बाद गणेश मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. दिनभर व्रत रखें और शाम के समय फिर पूजा करके आरती करें. कुछ लोग चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलते हैं.