कहीं आपका दिल समय से पहले तो नहीं थक रहा?

हम अक्सर अपने दिल की तुलना एक घड़ी से करते हैं, जो बिना रुके धड़कती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अंदरूनी घड़ी की रफ्तार पर गौर किया है?

मेडिकल भाषा में, आराम की स्थिति में (Resting Heart Rate या RHR) दिल का एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कना पूरी तरह से “नॉर्मल” माना जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर ‘सामान्य’ आंकड़ा आपकी अच्छी सेहत की गारंटी नहीं होता। एक मिनट में 60 बार और 90 बार धड़कने वाले दिल की सेहत के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है।

आइए, हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार से आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी धड़कन की रफ्तार कैसे आपके लंबे जीवन का राज खोलती है।

‘नॉर्मल’ दिखने वाले आंकड़े का धोखा
कई बड़े शोध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भले ही आपकी धड़कन 60-100 के ‘नॉर्मल’ दायरे में हो, लेकिन जैसे-जैसे यह आंकड़ा ऊपर की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे इंसान की उम्र कम होने का जोखिम भी बढ़ने लगता है।

इसे ऐसे समझें- अगर आपके दिल की धड़कन में केवल 10 बीट्स प्रति मिनट का इजाफा होता है, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। जिस इंसान का दिल आराम करते समय 90 बार धड़क रहा है, वह 60 बार धड़कने वाले दिल की तुलना में बहुत ज्यादा तनाव झेल रहा है। एक दशक के समय में यह करोड़ों अतिरिक्त धड़कनों में बदल जाता है, जो आपकी नसों और धमनियों को बेवजह घिसाता और कमजोर करता है।

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