
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर अमल के बाद भारतीय बाजार में अमेरिकी पिस्ता, बादाम, चेरी व सेब जैसे आइटम सस्ते हो जाएंगे। क्योंकि इन वस्तुओं के आयात पर समझौते पर अमल के बाद कोई शुल्क नहीं ल गेगा।
इन सारे आइटम में भारत में खपत के लायक उत्पादन नहीं होता है जिस कारण ये आइटम भारतीय बाजार में महंगे दाम पर बिकते हैं। यहां तक कि सेब भी आम आदमी की पहुंच से दूर है।
अमेरिकी पिस्ता, बादाम, चेरी और सेब होंगे सस्ते
खुदरा बाजार में सेब की कीमत 100 रुपए से प्रति किलोग्राम से अधिक ही रहती है।वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि कृषि व डेयरी आइटम को समझौते से दूर रखा गया है।
निर्यातक कह रहे हैं कि इसका मतलब हुआ कि अनाज, मांस व डेयरी उत्पाद पर शुल्क में कोई राहत नहीं दी गई है। अमेरिका में जेनेटिकली मोडिफाइड सोयाबीन व मक्के की बिक्री होती है और जीएम उत्पाद होने के कारण इन दोनों को भी सरकार भारत में आने की इजाजत नहीं देगी।
निर्यातकों ने बताया कि भारत ने हाल ही में ब्रिटेन और ईयू के साथ व्यापार समझौता किया है और उनमें वाइन के आयात पर शुल्क में राहत दी गई है। विदेश व्यापार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका से होने वाले समझौते में भी अल्कोहल के आयात पर राहत दी जा सकती है।
कृषि व डेयरी उत्पाद समझौते से बाहर रखे गए
ओलिव आयल के शुल्क भी कम हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि किसी भी समझौते में सामने वाले देश को अपना व्यापार बढ़ाने का मौका देना पड़ता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने एक्स पोस्ट में भारत में शून्य शुल्क पर सामान भेजने की बात कही है।
लेकिन जिन चीजों के आयात से भारत क े घरेलू मैन्यूफैक्च¨रग प्रभावित हो सकते है, उन चीजों का अमेरिका कोई खास उत्पादन और निर्यात नहीं करता है। अमेरिका मुख्य हाई टेक उत्पाद, हवाई जहाज, रक्षा उपकरण, ऑटोमोबाइल्स का उत्पादन व निर्यात करता है।
इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और बिजली के उपकरण सस्ते होंगे
भारत ने पहले ही अमेरिका से तेल की खरीदारी बढ़ा दी है और इस खरीदारी को बढ़ाई जा सकती है। बोअर ग्रुप एशिया के एमडी (इंडिया) अनुज गुप्ता कहते हें, भारत-अमेरिका व भारत व यूरोपीय यूनियन के बीच समझौते से चावल किसानों को अपने निर्यात को बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।
वहीं अमेरिका के साथ डील होने से भारत में इलेक्ट्रानिक्स आइटम के पार्ट्स, बिजली के उपकरण जैसे आइटम जीरो शुल्क पर आएंगे जिससे स्मार्टफोन के साथ बिजली के दाम भी कम होंगे।