
क्या आपको भी सुबह उठने के बाद घुटने और जोड़ों में दर्द या अकड़न रहती है। क्या आप दिनभर थकान महसूस करते हैं और आपको भूख कम लगती है। अगर ऐसा है तो ये आर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं। इसमें कभी-कभी बुखार भी हो सकता है।
यदि समय रहते इन लक्षणों का निदान नहीं हुआ, तो वह हाथों-पैरों, कोहनी, कूल्हे, घुटने समेत अनेक जोड़ों के लिए मुसीबत बन सकता है। अक्सर किसी भी बीमारी की शुरुआत में लोग थकान या दर्द को हल्का लक्षण मानकर अनदेखा कर देते हैं। समय बीतने के बाद बीमारी विकृत रूप ले लेती है।
कैसा हो खानपान?
साल्मन, टूना अदि मछलियां सूजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
फलों सब्जियों का सेवन भी सूजन कम करता है। इनमें मटर और बस फैट रहित होते हैं। इनमें एंटीआक्सीडेंट्स, फैलिक एसिड, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक भी पाए जाते हैं।
रिफाइंड अनाज की तुलना में साबुत अनाज का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए। इनमें पोषक तत्त्व और फाइबर की मात्रा अधिक होती है।
लेबल पढ़कर ही ब्रेड, अनाज और अन्य खाने का सामान खरीदना चाहिए।
सूजन बढ़ाने वाले आहार से बचें
अधिक तले-भुने ग्रिल्ड आहार।
चीनी और रिफाइंड कार्ब्स।
अधिक मात्रा में डेरी उत्पाद
शराब व तंबाकू का सेवन
नमक व प्रिजर्वेटिव वाले खाद्य पदार्थ आदि।
इन बातों का रहे ध्यान
अगर दर्द हो तो भी शरीरिक सक्रियता बनाकर रखनी चाहिए। हाथों-पैरों को चलाते रहना चाहिए।
योग और ध्यान से सूजन कम करने में मदद मिलती है।
प्रदूषण में बाहर निकलने से परहेज करें, मास्क का प्रयोग करें।
नींद से समझौता न हो, इसका ध्यान रहे। खराब नींद से मोटापा, अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
अगर आप लगातार तनाव में रहते हैं, तो यह रोग को और बढ़ा सकता है, यह ध्यान रखें।
पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है।
अपनाएं स्वस्थ जीवन शैली
डॉ. उमा कुमार (प्रोफेसर एवं विभागाध्या, रुमेटोलॉजी, एम्स, नई दिल्ली) रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक आटोइम्यून बीमारी है। यह तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए पर्यावरण व जीवनशैली भी जिम्मेदार है। किसी भी बीमारी का 30 से 40 प्रतिशत कारक जीन होता है, शेष बाहरी कारण होते हैं।
स्वस्थ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ऊतकों और कोशिकाओं पर हमला करने वाले वायरस, बैक्टीरिया आदि बचाव करती है, लेकिन बाहरी कारकों के प्रभाव में आकर जब इन कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन के स्वरूप में बदलाव होता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही शरीर की कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है।
इससे शरीर में सूजन उत्पन्न होने लगता है और आटोइम्यून बीमारियां पैदा होती हैं। वायु प्रदूषण, केमिकल पेस्टिसाइड, खराब खानपान आदि की इसमें बड़ी भूमिका है। बेहतर जीवनशैली से ही आर्थराइटिस जैसी बीमारी से बचाव संभव है।