
इजरायल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत ने ईरान और पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। इजरायल के मंत्री नीर बरकत ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने भविष्य में कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो इजरायल उसे सात गुना ज्यादा ताकत से करारा जवाब देगा।
दरअसल, दावोस में एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में इजरायल के मंत्री नीर बरकत ने ईरान ईरान पर दशकों से सशस्त्र गुटों को समर्थन देकर मध्य पूर्व को अस्थिर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘ईरान बुराई की धुरी का मुखिया रहा है। उन्होंने इजरायल को नष्ट करने का लक्ष्य रखा, हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें बनाईं, गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह को मजबूत किया और उन्होंने इजरायल के लिए एक खतरा पैदा किया।’
बरकत ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने दोबारा उकसाया तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं, गाजा के भविष्य और वहां प्रस्तावित शांति सेना को लेकर बरकत ने पाकिस्तान, कतर और तुर्की जैसे देशों की भागीदारी को सिरे से खारिज कर दिया। बरकत ने पाकिस्तान का नाम लेते हुए कहा कि “आतंकवाद का समर्थन करने वाले किसी भी देश का गाजा में स्वागत नहीं है।”
ईरान की कमजोरी उजागर
बरकत ने कहा कि इजरायली सैन्य अभियानों ने ईरान की उस कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है, जिसे वह अपनी ताकत के पीछे छिपाता रहा है। बरकत ने कहा कि हमने ईरान पर कड़ा प्रहार किया और उसे बुरी तरह पंगु बना दिया। ईरान उतना अधिक पावरफुल नहीं था, जितना समझता था।
यह ईरान के हित में है…
बरकत ने कहा कि मेरा मानना है कि इससे पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा है, और अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी। हालांकि, बरकत ने इस बात पर भी जोर दिया कि इजरायल का मुख्य उद्देश्य रक्षा करना है, सत्ता परिवर्तन नहीं। उन्होंने कहा कि इजराइल का हित इजराइल की रक्षा करना है। अगर वे कोई धमकी देते हैं, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे। अगर वे अपनी सरकार उखाड़ फेंकना चाहते हैं, तो यह ईरान के हित में है।
बरकत नेअगर ईरान अपना रुख बदलता है और इजरायल के साथ शांति स्थापित करना चाहता है, तो हमें उनके साथ सहयोग करने में खुशी होगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के शांति प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र से बेहतर विकल्प है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र पक्षपाती है।
हम उन पर भरोसा नहीं कर सकते
अंतर्राष्ट्रीय शांतिरक्षा प्रस्तावों पर बरकत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हम कतर, तुर्कों और पाकिस्तान जैसे देश को स्वीकार नहीं करेंगे। क्योंकि, वे गाजा में जिहादी संगठन का भरपूर समर्थन करते रहे हैं और हम उन पर भरोसा नहीं कर सकते कि वे वहां अपनी सेनाएं भेजें।