भाजपा ने किसानों को समझाने का बनाया प्लान, एमएसपी के सहारे विपक्ष को भी घेरने की तैयारी

सरोकारों के समीकरण साधने में जुटी भाजपा ने अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के सहारे किसानों से और करीबी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जुलाई को शाहजहांपुर में किसान सम्मेलन से इसकी शुरुआत करेंगे। अन्य नेताओं के भी दौरे होंगे। सम्मेलन व संगोष्ठियों के जरिये भी मोदी और योगी सरकार के किसानों के हित में किए गए फैसले बताए जाएंगे।

इस बीच, केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों और प्रदेश के प्रमुख नेताओं ने दौरे शुरू भी कर दिए हैं। ये सभी अपने दौरे में सिर्फ एमएसपी और किसानों के लिए किए गए कामों की ही चर्चा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की अन्य सभाओं में भी एमएसपी और किसानों के काम मुद्दा बनेंगे। शाहजहांपुर के अलावा प्रधानमंत्री मोदी 9 जुलाई को नोएडा और 14 व 15 जुलाई को आजमगढ़ व वाराणसी आने वाले हैं। 28 या 29 जुलाई को उनके लखनऊ आने की भी संभावना है।

भले ही कुछ किसान और विपक्ष खरीफ फसलों के लिए घोषित केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य को नाकाफी बता रहा हो, पर भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि उनके पास ऐसे तर्क हैं जिनसे वे किसानों को समझा सकेंगे। भाजपा का दावा है कि चुनाव के दौरान की गई घोषणा के अनुसार, उनकी सरकार ने किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का वादा पूरा कर दिया है। शाहजहांपुर प्रमुख धान और चावल उत्पादक जिला है। साथ ही पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है। माना जा रहा है कि इसीलिए किसानों के एजेंडे पर मोदी की सभा का आयोजन शाहजहांपुर में किया गया है।

इस तरह समझाएंगे
भाजपा ने रणनीति बनाई है कि कोई यदि लागत मूल्य का मुद्दा उठाता है तो उससे यही कहना है कि यह शुरुआत है। हो सकता है कि कहीं लागत ज्यादा आ रही हो, मगर सरकार की मंशा किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की है। कहीं अगर कुछ कमी रह गई है तो उसे भविष्य में ठीक किया जाएगा।

विपक्ष को घेरने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने एमएसपी के मुद्दे को लेकर गांव-गांव पहुंचने का फैसला किया है। पार्टी के कार्यकर्ता लोगों को खरीफ की फसलों के लिए घोषित समर्थन मूल्य का सूची देकर समझाएंगे कि भाजपा के पहले किसी सरकार ने एकमुश्त इतनी बढ़ोतरी कभी नहीं की। इसलिए जो विपक्ष केंद्र सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा कर रहा है, उससे पूछा जाना चाहिए कि उसकी सरकारों को किसानों की समस्याओं की चिंता क्यों नहीं हुई।

भाजपा के लोग यह भी बताएंगे कि प्रदेश में राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने ही यूपी में धान की सरकारी खरीद शुरू की थी। उससे पहले गैर भाजपा सरकारों को किसानों की समस्या के समाधान की कोई चिंता ही नहीं रही।

किसानों से जुडे़ अन्य काम भी बताएंगे

भाजपा ने खेती-किसानी को फोकस करते हुए अब तक किए गए सभी फैसलों को भी लोगों के बीच पहुंचाने की रणनीति बनाई है। इसमें किसानों की कर्जमाफी, नीम कोटेड यूरिया से किसानों को खाद की समस्या से निजात दिलाना, खाद और बीज पर मिलने वाली सब्सिडी का सीधे किसानों के खाते में भुगतान, आपदा से फसलों के नुकसान की राहत राशि में बढ़ोतरी, मानकों में बदलाव करके ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ दिलाने जैसे फैसले शामिल होंगे।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि हमारी सरकार ने काम किया है तो उसे बताएंगे ही। किसानों के हित के लिए इतने फैसले कभी नहीं लिए गए, जितने भाजपा सरकार ने किए।

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