खतरे में ओसामा को मारने में अमेरिका की मदद करने वाले डॉक्टर को जान

अलकायदा का सरगना आतंकी ओसामा बिन लादेन को मारने में अमेरिका की मदद करने वाले डॉक्टर की जान खतरे में है। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर डॉक्टर शकील अफरीदी को अज्ञात स्थान पर भेजा गया है। इसकी जानकारी पाकिस्तानी अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य ने दी। बता दें कि आतंकी बिन लादेन को खोजने में सीआइए (सेंट्रल इन्टेलिजेन्स एजेंसी) की मदद करने वाले डॉक्टर शाकिल अफरीदी पिछले 8 साल से जेल में बंद हैं।

अफरीदी के वकील कमर नदी ने कहा कि पेशावर की सेंट्रल जेल में उनके मुवक्किल को अकेले कैद में रखा गया। एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आइएसआइ) ने अफरीदी को सुरक्षित स्थान पर भेजा है। शकील अफरीदी के भाई जमील अफरीदी ने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि अफरीदी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

पेशावर जेल से शिफ्ट अफरीदी

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रांतीय सरकार ने अनुरोध किया कि कैदियों के बीच तालिबानी आतंकियों की मौजूदगी के कारण अफरीदी को पेशावर जेल से कहीं और शिफ्ट किया जाए, क्योंकि यहां उनकी जान को खतरा है।

वो फर्जी अभियान, जिसकी मदद से मारा गया था ओसामा

बता दें कि साल 2011 में शकील आफरीदी ने नकली हेपेटाइटिस वैक्सीनेशन प्रोग्राम के सहारे बिन लादेन के परिवार का लोकेशन पता किया। उन्होंने डीएनए सैंपल भी लिए, जिससे यह साफ हो गया कि एबटाबाद की कोठी में रहने वाला शख्स ओसामा बिन लादेन ही है। ऐसे अमेरिकी खुफिया एजेंसी को ओसामा को मारने में मदद मिली। गौरतलब है कि अमेरिकी विशेष बल ने हेलीकॉप्टर के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश किया और मई 2011 में एबटाबाद में छिपे आतंकी बिन लादेन को घर में घुसकर मारा था।

अफरीदी पर ट्रंप ने दिया था ये बयान

अफरीदी को आइएसआइ ने गिरफ्तार किया और उन्हें 23 मई 2012 को देशद्रोह के आरोप में 33 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। अफरीदी पर प्रतिबंधित संगठनों के साथ कथित संबंध होने का आरोप है। कुछ अमेरिकी सांसदों का मानना है कि सीआइए की मदद करने की डॉक्टर अफरीदी को सजा मिली है। अप्रैल, 2016 राष्ट्रपति चुनाव के अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे शकील अफरीदी को दो मिनट में बाहर निकलवा सकते हैं क्योंकि अमेरिका पाकिस्तान को काफी आर्थिक सहायता देता है। बता दें कि साल 2016 में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि में कटौती के खतरे के चलते अफरीदी की सजा 10 साल तक कम कर दी गई थी।

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