
अयोध्या जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में प्रशासन की सख्ती जारी है। डीजी जेल ने लापरवाही सामने आने पर एक और डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया। जांच में बैरक में भेजने से पहले चेकिंग न होने की पुष्टि हुई है।
अयोध्या जेल से दो बंदियों के फरार होने के शुक्रवार को डीजी जेल ने एक और डिप्टी जेलर को निलंबित किया है। उसके खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रकरण में अब तक जेल अधीक्षक समेत 12 अफसरों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है।
जिला जेल अयोध्या से 28 जनवरी की रात बैरक की दीवार में सेंध लगाकर दो बंदी फरार हो गए थे। इसमें अमेठी के मुसाफिरखाना का गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज और सुल्तानपुर का शेर अली शामिल था। दोनाें पर हत्या, डकैती, दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।
प्रकरण में डीआईजी जेल अयोध्या रेंज शैलेंद्र कुमार मैत्रेय की रिपोर्ट पर जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, जेलर जितेंद्र कुमार यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, हेड जेल वार्डर हरिहर प्रसाद व त्रिपुरारी मिश्र और जेल वार्डर सुरेश कुमार दुबे, जयप्रकाश यादव, सुनील कुमार, रमेश सहानी, रवि यादव व मनोज को निलंबित कर दिया गया था। अब शुक्रवार को एक अन्य डिप्टी जेलर राजू उर्फ राजदीप को भी निलंबित कर दिया गया है।
बिना चेकिंग बैरक में चले गए थे बंदी
डीआईजी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि रोजाना शाम को चेकिंग होने के बाद ही बंदियों को बैरकों के भीतर किया जाता है। जांच में सामने आया कि फरार हुए बंदी अपने साथ कोई उपकरण ले गए थे, जिसकी मदद से दीवार की ईटों को निकाला और वहां से भाग निकले। इससे स्पष्ट हुआ कि बैरक में भेजने से पहले इनकी चेकिंग नहीं की गई थी। चेकिंग की जिम्मेदारी डिप्टी जेलर राजू की थी। इस लापरवाही की वजह से उनको निलंबित किया गया है।
डीजी जेल ने कही ये बात
डीजी जेल पीसी मीणा ने बताया कि प्रकरण में एक और डिप्टी जेलर की लापरवाही उजागर हुई है। इसलिए उसको निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। गहनता से मामले की जांच जारी है। जो भी दोषी होंगे उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी।