कर्नाटक चुनाव में ‘लिंगायत समुदाय अब येदियुरप्पा को नहीं मानता अपना नेता’

नई दिल्लीः कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अब गिनती के दिन बचे हुए हैं. सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को पूरी ताकत से आजमा रहे हैं. भाजपा ने भी अब पीएम नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित 20 रैलियों से उम्मीद बनाए हुई है. इस बीच लिंगायत समुदाय का समर्थन हासिल करने को लेकर पार्टी परेशानी में फंस गई है. राष्ट्रीय बासवा सेना ने कहा है कि अब खुद लिंगायत ही भाजपा के सीएम फेस बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता नहीं मानते हैं.

चुनाव से पहले राज्य सरकार ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश की थी. इससे बाद से भाजपा के कोर वोट बैंक माने जाने वाले लिंगायत समुदाय में कांग्रेस ने एक तरह से सेंध लगाने की कोशिश की. राष्ट्रीय बासवा सेना के महासचिव एपी बासवाराज ने कहा कि अब लिंगायत भाजपा के सपोर्टर नहीं रह गए हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 2014 में समुदाय के कई नेताओं ने लोकसभा चुनाव जीता लेकिन उन्हें पीएम मोदी की सरकार में कोई जगह नहीं दी गई.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने भले ही येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है लेकिन अब लिंगायत समुदाय का ही उनमें भरोसा नहीं रह गया है. वे खुद को मौजूदा सीएम सिद्दारमैया के ज्यादा करीब महसूस करने लगे हैं. सिद्दारमैया खुद कई सालों से बसवा दर्शन के फॉलोवर हैं. विधानसभा चुनाव से पहले मार्च में सिद्दरमैया की सरकार ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश की थी. हालांकि राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने राजनीतिक उद्देश्य से लिंगायत को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा देने की सिफारिश की. राज्य में 12 मई को मतदान और 15 मई को मतगणना होगी.

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टिकट बंटवारे में भी येदियुरप्पा की नहीं चली

टिकटों के बंटवारे को लेकर येदियुरप्पा की नहीं चली और वह अपने ज्यादातर समर्थकों को टिकट नहीं दिलवा पाए. लोकसभा सांसद और येदियुरप्पा की करीबी शोभा करंदलाजे को भी विधानसभा का टिकट नहीं मिला. जबकि येदियुरप्पा खुद चाहते थे कि वह चुनाव लड़ें. येदियुरप्पा की कई मांगों को बीजेपी हाईकमान ने नकार दिया.

पार्टी आलाकमान ने सांसदों को चुनाव नहीं लड़ाने की बात करके उनकी दावेदारी खारिज कर दी. श्रीरामुलू भी सांसद हैं लेकिन उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने की इजाजत मिल गई. कर्नाटक बीजेपी में कई पावर सेंटर बन गए हैं. येदियुरप्पा को इन चुनौतियों से भी जुझना पड़ रहा है. संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार लंबे समय तक येदियुरप्पा के विरोधी रहे हैं.

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