झारखंड में पहली बार दलीय आधार पर निकाय चुनाव, भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत

रांची: झारखंड में पहली बार दलीय आधार पर निकाय चुनाव होने जा रहा है. बीजेपी के सामने अधिक से अधिक सीट जीतने की चुनौती है. सत्ता में होने के कारण से विरोधियों को मात देना बीजेपी के लिए प्रथमिकता है. पार्टी निकाय चुनाव में विपक्षी एकजुटता नहीं होने का फायदा उठाना चाहती है. अपनी रणनीति और मोर्चेबन्दी से ‘शहर की सरकार’ पर काबिज होकर ‘मिशन-19’ के हौसलों को परवान देना चाहती है.

फिलहाल झारखंड में निकाय चुनाव तमाम दलों की प्राथमिकता सूची में है. पहली बार दलीय आधार पर चुनाव हो रहा है. सभी दलों को खुद को तौलने का यब बेहतर मौका है. राज्यसभा चुनाव में भले ही विपक्षी एकजुटता दिखी, लेकिन निकाय चुनाव में तमाम विपक्षी पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ मैदान में ताल ठोक रही है.

झारखंड बीजेपी अब निकाय चुनाव को क्वाटर फाइनल बता रही है. मुकाबले के लिए अपनी मजबूत मोर्चाबंदी भी कर ली है. हर एक निकाय के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास के निर्देश पर प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई है. ये चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक क्षेत्र में रहेगें साथ ही चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोकेंगे.

निकाय चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने अपने अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का आदेश दिया है. नगर विकास मंत्री सीपी सिंह की मानें तो रघुवर सरकार ने हर क्षेत्र में विकास का काम किया है. हर निकाय में बिजली पानी, सड़क और लाइट लगवाई गई है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी सिम्बल, काम और उम्मीदवार के आधार पर जनता के बीच है.

निकाय चुनाव में बीजेपी के लिए अधिक से अधिक सीट पर जीत दर्ज करना चुनौती है, बल्कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं के हौसले को उड़ान भी देना है.

 
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