सूचना के अधिकार कानून का उपयोग निहित स्वार्थ के लिए न करें – राज्यपाल

कानून का उद्देश्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करना तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है – श्री नाईक
लखनऊः 10 मार्च, 2018
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज आंचलिक विज्ञान केन्द्र, अलीगंज में संस्था फाउंडेशन फाॅर पीपुल्स राईट टू इंफाॅरमेशन द्वारा आयोजित 12वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी – ‘सूचना का अधिकार 2005 क्रियान्वयन, समस्या और समाधान’ का उद्घाटन किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता न्यायमूर्ति कमलेश्वर नाथ ने की तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी उपस्थित थे। इस अवसर पर न्यायमूर्ति एस0सी0 वर्मा, डाॅ0 शाकिर हाशमी व सूचना के अधिकार से जुड़े प्रतिनिधिगण उपस्थित थे। राज्यपाल ने कार्यक्रम में सुश्री समीना अफजाल द्वारा सूचना के अधिकार पर लिखित एक पुस्तक का विमोचन भी किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून का उपयोग निहित स्वार्थ के लिए न करके जनता के लाभ के लिए होना चाहिए। सूचना के अधिकार की पूरी जानकारी रखते हुए उसके दायरे में आने वाली सूचना को सही ढंग से प्राप्त की जाए तो समस्या का निदान हो सकता है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार का कार्य देखने वाले अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए ताकि सुचारू रूप से कार्य किया जा सके।
श्री नाईक ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून एक महत्वपूर्ण अधिकार है जो जनता को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में संसद में पारित हुआ था किन्तु नियमावली न होने से प्रदेश में काफी दिक्कते आ रही थीं। राज्यपाल ने राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार नियमावली 2015 तैयार करने हेतु प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नियमावली बन जाने से लोगों को सूचना का अधिकार कानून के प्रयोग में अधिक सुगमता होगी।
राज्यपाल ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य शासन एवं प्रशासन तंत्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रदेश में सुशासन की स्थापना में सूचना का अधिकार अधिनियम का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को जितने बेहतर तरीके से लागू किया जायेगा, प्रदेश में शासन व प्रशासन की कार्यप्रणाली में उतना अधिक सुधार आयेगा।
न्यायमूर्ति कमलेश्वर नाथ ने कहा कि संविधान में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया है पर दुर्भाग्य है कि कानून का सुचारू रूप से क्रियान्वयन नहीं होता। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में विधिक पृष्ठभूमि को आवश्यक किया जाए। लोकसभा व राज्यसभा की सूचना प्राप्त करने के लिए मात्र सौ रूपये फीस है जबकि विधान सभा के लिए पांच सौ रूपये की फीस देनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शुल्क में एकरूपता होनी चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक श्री अबरार अंसारी ने स्वागत उद्बोधन के साथ संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। उद्घाटन सत्र के बाद संगोष्ठी के विषय पर चर्चा का भी एक सत्र रखा गया था।

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