सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से पूछा, अवैध खनन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?

मेघालय सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक गैरकानूनी कोयला खदान में 13 दिसंबर से फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये नौसेना ने पांच रिमोट चालित वाहनों को काम में लगाया है. न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को राज्य सरकार ने बताया कि इस गैरकानूनी खदान से अभी तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला गया है परंतु पास की नदियों से इसमें हो रहा रिसाव बचाव अभियान में बधायें पैदा कर रहा है.सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से पूछा, अवैध खनन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?

पीठ ने राज्य सरकार के वकील से जानना चाहा कि क्या इस तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है. राज्य सरकार के वकील ने न्यायालय को बताया कि गैरकानूनी खदान चलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है.

कोर्ट ने कहा कि वो आगे इस पहलू पर भी सुनवाई करेगा. अभी प्राथमिकता राहत कार्यों में तेज़ी लाने की है. केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि खदान में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये हरसंभव कदम उठाये जा रहे हैं और भारतीय वायु सेना ने जरूरी उपकरणों और व्यक्तियों को पहुंचाने के लिये विमान तथा हेलीकाप्टर तैनात किये हैं.

पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस मामले को 18 जनवरी के लिये सूचीबद्ध कर दिया. शीर्ष अदालत गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे 15 श्रमिकों को बचाने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाने हेतु आदित्य एन प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इससे पहले, केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि मजदूरों को बचाने के लिये सभी उचित कदम उठाये जा रहे हैं.

सालिसीटर जनरल ने न्यायालय को बताया था कि बचाव और राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 71 सदस्यों के साथ ही राज्य आपदा मोचन बल के 20, नौसेना के 16 कार्मिक और ओडिशा अग्निशमन तथा कोल इंडिया लि सहित अन्य लोग दिन रात बचाव कार्य में लगे हुये हैं.

मेघालय सरकार ने भी बचाव अभियान की प्रगति के बारे में एक रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी और कहा था कि दुर्घटनास्थल पर उचित सुविधाओं के अभाव और मुश्किल क्षेत्र की वजह से राहत के काम में परेशानियां आ रही है. राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि इस गैरकानूनी कोयला खदान का कोई खाका नहीं है क्योंकि इसमे अवैध तरीके से खनन हो रहा था और इसमें बचाव कार्य बहुत ही चुनौती भरा है. राज्य सरकारी का कहना था कि पास ही बहने वाली एक नदी का पानी इस खदान में घुस रहा है और यह कम से कम 20 दूसरी खदानों से परस्पर जुड़ी हुई है.
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