अपनी मिट्टी से दूर होती भाजपा की जड़ें खोद रहा जमींदोज विपक्ष

अपनी मिट्टी से दूर होती भाजपा की जड़ें खोद रहा जमींदोज विपक्ष

# दलितों-पिछड़ों के तुष्टिकरण के लिए भाजपा को मजबूर करेगी सपा-बसपा

# ताकि भाजपा का आधार ब्राह्मण, बनिया-ठाकुर दरक जाये

# कश्मीर और त्रिपुरा में गठबंधन सरकारें बनाने के रास्ते आसान करके राष्ट्रवाद पर उंगलियां उठा रहा विपक्ष

# भाजपा की विचारधारा का अतिक्रमण करने लगी उसकी सत्ता की हवस

देश भर में भाजपा का बढ़ता विजय रथ विरोधियों को धूल चटा रहा है। धूल ही को संजीवनी समझ रहे विरोधी दल ताकतवर भाजपा को किस तरह धीमा जहर पिला रहे है इस बात का अंदाजा कम ही लोगों को होगा। लोगों की नजरों में सिमटता विपक्ष डरा-सहमा और खामोश है। जमीन पर आ चुके भाजपा विरोधी दलों की लगातार विफलताओं ने इन्हें जमींदोज (जमीन के भी नीचे) कर दिया है। दुनिया भले ये ही मान रही हो। लेकिन लोगों की नजरों में लुंज-पुंज विपक्ष सत्ता के नशे में चूर भाजपा की सफलताओं की जड़ों को जमीन के नीचे से धीरे-धीरे काट रहा है।

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दशकों से सत्ता से बेदखल रही भाजपा को जब सत्ता की नेमते मिलना शुरु हुयीं तो चाल, चरित्र, चेहरे वाली ये पार्टी अपनी विचार धारा और आधार को नजरअंदाज कर सत्ता की हवस में अंधी सी दिखाई देने लगी। किसी राज्य में 4 सीटें जीत कर भी जोड़-तोड़ का मैनेजमेंट हो या जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा में गठबंधन सरकार बनाने की सफलता हो। सत्ता की हवस ऐसी जिन सफलताओं का मजा दे रही है एक दिन विफलताओं की सजा दे सकती है।

आतंकवादी अफजल गुरू की फांसी का विरोध करने और अलगाववादियों का साथ देनी वाली महबूबा मुफ्ती के साथ सरकार बनाने वाली भाजपा ने अब त्रिपुरा में तिरंगा जलाने वाले क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन सरकार बना ली।

मेरे ख्याल में ऐसी सरकारों की ताकत से कही ताकतवर थी अटूट विचारधारा वाली अतीत की सत्ता विहीन भारतीय जनता पार्टी।
शायद यही कारण है कि कांग्रेस और वाम दलों जैसी राजनीतिक दिग्गज शक्तियों ने भाजपा के मूल सिद्धांतों को उसकी सत्ता की हवस से ही मार देने के लिए ऐसे राज्यों में सरकार बनाने का पूरा मौका दे दिया।
और अब यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा को पिछड़ों-दलितों का तुष्टिकरण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि अपर कास्ट का आधार भाजपा के हाथ से धीरे-धीरे फिसलता रहे।

माया-मुलायम और कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ने वालों को यही उम्मीद थी कि अब वोटों की लालच में किसी जाति-धर्म विशेष की एक्स्ट्रा केयर नहीं होगी। कश्मीर और नार्थ ईस्ट के अलगाववादियों (तिरंगा जलाने वालों) को मुंह नहीं लगाया जायेगा। लेकिन पूर्व सत्तानशीन वर्तमान सत्तानशीन भाजपा को भी अपना जैसा बनाने पर मजबूर कर रहे हैं। गौर से देखिए। तमाम सियासी चालें अदृश्य होती हैं।

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