
अयोध्या के राम मंदिर परिसर में एक मुस्लिम युवक द्वारा कथित तौर पर नमाज अदा करने की कोशिश किए जाने की खबर सामने आने के बाद साधु-संतों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस घटना को लेकर संत समाज ने इसे मंदिर की मर्यादा और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया है और सरकार व प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। साधु-संतों का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां ऐसी किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों।
संत समाज ने उठाए सवाल, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
संत समाज ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जाती है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने मांग की कि मंदिर परिसर की सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। कुछ संतों ने यह भी कहा कि घटना से जुड़े लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि राम मंदिर की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा।
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास का बयान
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि राम मंदिर में नमाज पढ़ने की कोशिश की खबर दुखद और निंदनीय है। उन्होंने प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
राम दल ट्रस्ट और अन्य संतों की प्रतिक्रिया
राम दल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि ने कहा कि राम जन्मभूमि परिसर में किसी भी तरह की असंगत गतिविधि स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जाए। वहीं राष्ट्रवादी बाल संत दिवाकर आचार्य ने मंदिर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करनी चाहिए, ताकि मंदिर की मर्यादा और शांति बनी रहे।
प्रशासन से सख्त निगरानी की मांग
संतों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर क्षेत्र में नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो। उनका कहना है कि इससे ना केवल धार्मिक भावनाओं की रक्षा होगी, बल्कि शांति और सौहार्द भी बना रहेगा।