लोक कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है हिंदू धर्म : योगी आदित्यनाथ

ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के पुण्यतिथि समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हिंदू होने की परिभाषा मंदिर जाना और टीका लगाना है। सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना और अपने कर्तव्यों को पूरा करना ही हिन्दू धर्म का उद्देश्य है। व्यक्ति के साथ समाज और संसार का कल्याण भाव ही धर्म है। हमने इसे किसी संकीर्णता के साथ नहीं जोड़ा। हमारे यहां अवतारों की परंपरा यही कहती है।

उन्‍होंने कहा कि गोरक्षपीठ अपने पूज्य आचार्यों दिग्विजय नाथ और अवेद्यनाथ की स्मृति में इस कार्यक्रम को हर साल मनाती है। इन दोनों पूज्य संतो का जीवन जिस लोक कल्याण के लिए समर्पित था, उसी को ध्यान में  रखते हुए समारोह में आयोजित होने वाली संगोष्ठियों का विषय निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमारी संस्कृति की बात आती है तो उसका निचोड़ परोपकार में सम्पन्न होता है। लोक कल्याण हमारी संस्कृति का ध्येय है। प्राचीन काल से जब दुनिया अन्धकार में थी, उस समय भी भारत की गुरुकुल परम्परा में लोगों को सत्य का भाव कराया जाता था। आज भी सरकार उतना काम नहीं करती, जितना धर्मार्थ और सांस्कृतिक संगठन द्वारा लोक कल्याण कराया जाता है।

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समारोह के पहले दिन ‘लोक कल्याण भारतीय संस्कृति की विशेषता है।’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता भारत सरकार के मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह  ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल वेद है। मानव के तीन बड़े शत्रु है अज्ञान, अभाव और अन्याय। योगी आदित्‍य नाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस तरह से गुंडे अपराधी भाग रहे हैं वो भी एक लोक कल्याण है। हमे यह संकल्प लेना होगा की हमें ज्ञान का डीप जलाएंगे और अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे। भारतीय संस्कृति का मूल वेद है। मानव के तीन बड़े शत्रु है अज्ञान, अभाव और अन्याय। योगी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस तरह से गुंडे अपराधी भाग रहे हैं वो भी एक लोक कल्याण है। हमें यह संकल्प लेना होगा की हम ज्ञान का दीप जलाएंगे और अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे।

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