जर्मन पिता और भारतीय मां के विवाद में फंसा बच्ची का भविष्य, जानें- HC ने क्या कहा

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बच्चे के बेहतर भविष्य को देखते हुए हाई कोर्ट ने जर्मन नागरिक द्वारा बेटी की कस्टडी मांगने की याचिका को ठुकरा दिया। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व न्यायमूर्ति आइएस मेहता की पीठ ने कहा कि बच्ची के वर्तमान शैक्षिक वर्ष के समाप्त होने तक उसे उसकी मां से अलग कर याचिकाकर्ता के साथ जर्मनी भेजना उचित नहीं होगा। पीठ ने कहा कि ऐसे में जर्मन नागरिक की याचिका को रद किया जाता है। हालांकि, पीठ ने जर्मन नागरिक को उसकी बेटी से मिलने के संबंध में कई दिशा निर्देश जारी किए हैं।

पीठ ने दोनों पक्षों को अपने स्तर से विवाद को सुलझाने का सुझाव दिया है। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब भी याचिकाकर्ता भारत आएगा वह सार्वजनिक स्थान पर सप्ताह में किसी एक दिन चार घंटे के लिए बेटी से मिल सकेगा। साथ ही बच्ची के दादा-दादी को भी मिलने की अनुमति होगी। याचिकाकर्ता वीडियो कॉल के जरिये भी बेटी से संपर्क कर सकता है।

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पीठ ने कहा कि वर्तमान शैक्षिक वर्ष समाप्त होने पर याचिकाकर्ता अग्रिम कार्रवाई के लिए फैमली कोर्ट में संपर्क कर सकता है और अदालत को मामले की सुनवाई करनी होगी। याचिकाकर्ता जर्मन नागरिक की तरफ से दायर याचिका के अनुसार उसने हिन्दू युवती से बेंगलुरु में दिसंबर 2011 में शादी की थी और फिर दोनों बेंगलुरु में रहने लगे थे।

मार्च 2013 में दंपती की बेटी हुई। इसके बाद फरवरी 2017 याची की नौकरी दुबई में लग गई। याची पत्नी व बेटी के साथ दुबई चला गया। अक्टूबर 2017 में दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और इसके बाद याचिकाकर्ता की पत्नी बेटी को लेकर भारत आ गई थी।

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