
भागदौड़ भरी जिंदगी में आधुनिक लाइफस्टाइल के साथ ही बढ़ता प्रदूषण और तनाव के अलावा अव्यवस्थित खानपान युवा पीढ़ी को थायरॉइड से ग्रसित कर रहा है। डाक्टरों का मानना है कि यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थायरॉइड के मामले अधिक हो रहे हैं।
इसके प्रमुख लक्षण बिना काम किए थकान महसूस होना, अचानक वजन कम होना या बढ़ने के साथ ही बालों का झड़ना, त्वचा का सूखापन, ठंड लगने के अलावा कब्ज की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो यह आगे गंभीर समस्या बनकर थायरॉइड की ओर ले जाता है।
महिलाओं में पुरुषों से अधिक थायरॉइड के मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि थायरॉइड को अब लाइफस्टाइल डिजीज माना जा सकता है, क्योंकि अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और नींद की कमी से हार्मोन असंतुलन होता है। महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले थायरॉइड के मामले अधिक मिल रहे हैं। इसका आंकड़ा 7-10 गुना ज्यादा महिलाओं में देखने को मिल रहा है। इसके पीछे का कारण हार्मोनल बदलाव (जैसे पीरियड्स, गर्भावस्था, मेनोपाज), आटोइम्यून बीमारियां और एस्ट्रोजन हार्मोन हैं। पुरुषों में थायरॉइड शुक्राणु क्वालिटी और क्वांटिटी कम करता है, इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है।
अव्यवस्थित खानपान, आयोडीन की कमी के साथ ही अधिक प्रदूषण थायरॉइड का बन रहा प्रमुख कारण
7-10 गुना ज्यादा महिलाओं में देखने को मिल रहे थायरॉइड के मामले, 16-25 साल में थायरॉइड के मामले बढ़ रहे, बाल झड़ना आम लक्षण
डॉ. पायल जैन (प्रो. व विभागाध्यक्ष जनरल मेडिसिन विभाग जिम्स) कहती हैं, “आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक है। थायरॉइड में सूजन गाइटर का कारण बन सकते हैं। यह कैंसर जैसी बीमारी के भी संकेत देते हैं। गाइटर में गर्दन के सामने बिना दर्द सूजन आ जाती है।”
16-25 साल में थायरॉइड के मामले बढ़ रहे हैं
बाल झड़ना (खासकर हाइपोथायरॉइडिज्म में ) थायरॉइड का आम लक्षण होता है। बच्चों और युवाओं (खासकर 16-25 साल ) में थायरॉइड के मामले बढ़ रहे हैं। स्ट्रेस, फास्ट फूड और पढ़ाई के प्रेशर से ग्रोथ, एकाग्रता और वजन प्रभावित होता है।
डॉ. अश्विनी कंसल (सीनियर कंसलटेंट यथार्थ हास्पिटल ग्रेनो) कहती हैं, “गर्भावस्था में अनकंट्रोल्ड थायरॉइड से गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी या बच्चे का कम वजन हो सकता है। महिलाओं में पीरियड्स अनियमित, पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम बढ़ता है। फर्टिलिटी प्रभावित होती है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार थायरॉइड होने के बाद पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता हैं, लेकिन इसपर कंट्रोल किया जा सकता है।
योग से किया जा सकता है बचाव
नियमित योग करने से काफी राहत मिलती है। योग में (सूर्य नमस्कार, उष्ट्रासन, प्राणायाम), नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से टीएसएच लेवल सुधरता है। यह दवाओं के साथ काम्बिनेशन में बेहतर काम करते हैं।