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	<title>राष्ट्रीय Archives - Haqeeqat Today</title>
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	<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/category/राष्ट्रीय</link>
	<description>Most Popular Urdu News Paper &#38; Portal</description>
	<lastBuildDate>Thu, 09 Jul 2026 11:36:47 +0000</lastBuildDate>
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	<item>
		<title>ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल के पैराशूट का किया सफल परीक्षण</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/335097</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:36:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज बुधवार, 8 जुलाई को गगनयान क्रू मॉड्यूल के लिए मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण कर लिया है। मध्य प्रदेश के श्योपुर में एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ड्रॉप जोन में यह परीक्षण किया गया। इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज बुधवार, 8 जुलाई को गगनयान क्रू मॉड्यूल के लिए मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण कर लिया है।</p>
<p>मध्य प्रदेश के श्योपुर में एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ड्रॉप जोन में यह परीक्षण किया गया। इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल का किया सफल परीक्षण</h3>
<p>ISRO ने मिशन के सफल परीक्षण के बाद बयान जारी करते हुए कहा, ‘इस परीक्षण का मकसद पहले बिना क्रू वाले गगनयान G1 मिशन के दौरान ज्यादा से ज्यादा संभावित लोड की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मजबूती और डिजाइन मार्जिन को परखना था।’</p>
<p>परीक्षण के दौरान, भारतीय वायु सेना के IL-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से एक नकली असेंबली को गिराया गया, जिसमें एक मुख्य पैराशूट और एक डमी पेलोड शामिल था।</p>
<p>इसे गिराने के बाद, असेंबली को स्थिर करने और नीचे आने की गति को काफी कम करने के लिए एक ‘ड्रोग’ पैराशूट खोला गया। इसके बाद मुख्य पैराशूट खोला गया, जिससे पेलोड सुरक्षित गति (टर्मिनल वेलोसिटी) के साथ नीचे उतरा।</p>
<h3 class="wp-block-heading">पैराशूट सिस्टम की हुई चेकिंग</h3>
<p>ISRO ने बताया, IMAT-05 के सफल समापन से पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन (G1) के लिए मुख्य पैराशूट सिस्टम के प्रदर्शन और उसके सही काम करने से भरोसा मिलता है।’</p>
<p>इसरो ने आगे बताया, ‘यह गगनयान मिशन के लिए अहम मुख्य पैराशूट को परखने के लिए इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT) की सीरीज का पांचवां परीक्षण है।’</p>
<p>गगनयान क्रू मॉड्यूल में पैराशूट सिस्टम लगा है जिसमें चार अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट हैं। हर पैराशूट को मॉड्यूल के नीचे उतरने के दौरान एक खास काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>गगनयान क्रू मॉड्यूल में पैराशूट सिस्टम में दो ‘एपेक्स कवर सेपरेशन’ पैराशूट शामिल हैं। ये पैराशूट सुरक्षात्मक एपेक्स कवर को अलग करते हैं जो पैराशूट कंपार्टमेंट को वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान पैदा होने वाली तेज गर्मी से बचाता है।</p>
<p>इस पैराशूट सिस्टम में नीचे उतरते मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी स्पीड को कम करने के लिए दो ‘ड्रोग’ पैराशूट भी हैं। साथ ही, तीन ‘पायलट’ पैराशूट हैं जो नीचे उतरने के आखिरी चरण के लिए तीन मुख्य पैराशूट को अलग से बाहर निकालते और खोलते हैं।</p>
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		<item>
		<title>‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को बनाएं देश का जन-आंदोलन: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/335063</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:43:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को देश के युवाओं की शक्ति का उपयोग करते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सरकार और समाज दोनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।नड्डा ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को देश के युवाओं की शक्ति का उपयोग करते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सरकार और समाज दोनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।नड्डा ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के साथ उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<p>उन्होंने स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और रक्षा बलों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हाल ही में प्रगति समीक्षा बैठक में युवाओं और संस्थानों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया था।</p>
<p>उन्होंने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों को अभियान से अधिक संख्या में जोड़ने, स्क्रीनिंग शिविर आयोजित करने तथा स्कूलों, कालेजों और समुदायों में जागरूकता अभियान तेज करने को कहा।</p>
<p>बैठक में मनसुख मांडविया ने मेडिकल कालेजों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में लगभग छह लाख स्नातक और दो लाख स्नातकोत्तर मेडिकल छात्र टीबी उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>महाराष्ट्र-यूपी और ओडिशा समेत 23 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, MP में बाढ़ जैसे हालात</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/335025</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 08:55:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिससे उत्तर से लेकर दक्षिण तक झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने आज महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-NCR सहित कई राज्यों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का हाई अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को सावधान रहने की &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[

देश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिससे उत्तर से लेकर दक्षिण तक झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने आज महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-NCR सहित कई राज्यों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का हाई अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी भी गई है।

 

बता दें कि मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार 7 जुलाई को देश के कई हिस्सों के लिए मौसम का ताजा अपडेट जारी किया है। सक्रिय मानसून के कारण देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही, अगले 24 घंटों में कई जगहों पर आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है, इसके चलते यातायात पर भी गहर असर हुआ है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>पहले समझिए महाराष्ट्र का कैसा रहेगा हाल?</strong></h3>
 

महाराष्ट्र के लिए मौसम विभाग ने खास चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के इन इलाकों में बेहद भारी बारिश होने की आशंका है। वहीं मुंबई और आसपास के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 

इसके अलावा विदर्भ के इलाके में भी भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही पिछले 24 घंटों में भी कोंकण और मध्य महाराष्ट्र में रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की जा चुकी है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>पूरे देश में कहां-कहां होगी भारी बारिश?</strong></h3>
 

मौसम विभाग के मुताबिक, झारखंड और ओडिशा के ऊपर एक &#8216;डिप्रेशन&#8217; बना हुआ है, जो धीरे-धीरे मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ रहा है। इसके असर से उत्तर से लेकर पश्चिम भारत तक के राज्यों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

 

मिली जानकारी अनुसार तेज बारिश की संभावना दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा मध्य और पूर्वी भारत के राज्य बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>पूर्वोत्तर भारत का कैसा है हाल?</strong></h3>
 

बात अगर अब पूर्वोत्तर भारत की करें तो असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में झमाझम बारिश की संभावना जताई गई है।वहीं दक्षिण भारत में केरल और कर्नाटक के तटीय व अंदरूनी इलाक में भारी बारिश की संभावना है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>इन क्षेत्रों में जारी किया गया विशेष चेतावनी</strong></h3>
 

मौसम विभाग के अनुसार कोंकण और गुजरात के अलावा मध्य महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>तेज हवाएं और आंधी-तूफान का भी अलर्ट</strong></h3>
 

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (जो बढ़कर 60 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है) की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। इसका असर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखने को मिलेगा। वहीं कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में और भी तेज आंधी 50-70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आ सकती है।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>मौसम विभाग की जरूरी सलाह</strong></h3>
 

गौरतलब है कि लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सावधान रहने को कहा है। निचले इलाकों में जलजमाव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा है। सड़कों पर विजिबिलिटी कम होने से ट्रैफिक जाम हो सकता है। इन सभी चिंताओं को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और बहुत जरूरी न होने पर भारी बारिश के दौरान यात्रा करने से बचें।

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			</item>
		<item>
		<title>मुंबई के समुद्र में विदेशी मालवाहक जहाज फंसने से हड़कंप</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/335022</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 08:37:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुंबई के बोरीवली वेस्ट में गोराई इलाके के पास स्थित मनोरी बीच के समंदर में 5 जुलाई को एक विदेशी मालवाहक जहाज पानी कम होने के कारण फंस गया। पूरे मामले को ऐसे समझिए कि खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण तीन विदेशी मालवाहक जहाज बहकर तट के करीब आ गए। इनमें से एक &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

मुंबई के बोरीवली वेस्ट में गोराई इलाके के पास स्थित मनोरी बीच के समंदर में 5 जुलाई को एक विदेशी मालवाहक जहाज पानी कम होने के कारण फंस गया। पूरे मामले को ऐसे समझिए कि खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण तीन विदेशी मालवाहक जहाज बहकर तट के करीब आ गए।

 

इनमें से एक जहाज &#8216;एमटी अल जाफजिया&#8217; (निकारागुआ के झंडे वाला) अपनी लंगर की चेन टूटने के कारण मनोरी द्वीप से महज एक किलोमीटर की दूरी पर आकर बहाव में फंस गया। राहत की बात यह है कि इस जहाज पर कोई क्रू मेंबर मौजूद नहीं था।

 

<strong>खराब मौसम के कारण बह गए जहाज</strong>

 

पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल के मुताबिक, समंदर में मौसम बेहद खराब था और तेज हवाएं चल रही थीं। ऐसे में यह जहाज बिना क्रू के लंगर पर खड़ा था, जो चेन टूटने से बहकर मनोरी बीच के बिल्कुल पास आ फंसा।

 
<h3 class="wp-block-heading"><strong>अन्य दो जहाज कौन-कौन से?</strong></h3>
 

दूसरी ओर एमटी एस्फाल्ट स्टार (माली का झंडा) और एमटी स्टेलर रूबी (ईरान का झंडा) वाला ये दोनों कोलतार और तेल के टैंकर हैं। लंगर पर होने के बावजूद भारी तूफान के कारण ये दोनों भी बहकर मनोरी द्वीप से करीब 20 किलोमीटर (11 समुद्री मील) की दूरी तक आ गए।

 

फिलहाल ये दोनों सुरक्षित जगह पर लंगर डाले हुए हैं और इनके क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित हैं। वहीं तटरक्षक बल के जहाज &#8216;आईसीजीएस सम्राट&#8217;, &#8216;सागर प्रहरी&#8217; और इमरजेंसी जहाज &#8216;वॉटर लिली&#8217; को मौके पर निगरानी और मदद के लिए तैनात किया गया है।

 
<h3 class="wp-block-heading">स्थानीय मछुआरों ने दी पुलिस को सूचना</h3>
 

मिली जानकारी के अनुसार मुंबई का मनोरी बीच का इलाका काफी पथरीला है और हवाएं बहुत तेज थीं। स्थानीय मछुआरों ने जब इस विशालकाय जहाज को तट के इतने पास देखा, तो उन्हें समझ आ गया कि किसी छोटी नाव के लिए वहां जाना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने तुरंत गोराई पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और कोस्ट गार्ड ने मोर्चा संभाला।

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			</item>
		<item>
		<title>आगरा से  टूंडला-फतेहाबाद और फतेहपुर सीकरी के लिए भी ऐसी बसें, 100 ई-बसों की सौगात</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334984</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:55:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आगरा में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने कदम उठाया है। शहर के ई-बसों के बेड़े में जल्द ही 100 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। इसके लिए प्रशासन को मंजूरी मिल चुकी है। नई ई-बसों का दायरा शहर तक ही सीमित &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

आगरा में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने कदम उठाया है। शहर के ई-बसों के बेड़े में जल्द ही 100 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। इसके लिए प्रशासन को मंजूरी मिल चुकी है।

 

नई ई-बसों का दायरा शहर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों तक चलाया जाएगा। योजना के अनुसार इन बसों का संचालन मुख्य रूप से टूंडला, फतेहाबाद रोड, फतेहपुर सीकरी मार्ग और शहर से जुड़े अन्य ग्रामीण मार्गों पर किया जाएगा। बसों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनके रखरखाव और चार्जिंग के लिए एक नए डिपो की आवश्यकता होगी।
आगरा-मथुरा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के सीईओ एवं एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान ने बताया कि नए डिपो के लिए कुबेरपुर और मेहताब बाग के पास जमीन का सर्वे कराया गया है।

 

डिपो की जगह जल्द ही फाइनल कर ली जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न मार्गों पर रूट और किराया तय करने के लिए भी सर्वे का काम चल रहा है।एडीएम सिटी के मुताबिक ये 100 नई बसें अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त और हाईटेक होंगी। यात्रियों की सुविधा और रूट की आवश्यकता के अनुसार इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। सात मीटर लंबी 50 और नौ मीटर लंबी 50 बसें होंगी।

 

<strong>शहर को मिलेगी जाम से राहत</strong>
वर्तमान में एमजी रोड सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर 100 ई-बसों का संचालन किया जा रहा हैं। 100 नई बसें मिलने के बाद ई-बसों की कुल संख्या 200 हो जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सार्वजनिक परिवहन को भारी बढ़ावा मिलेगा, जिससे सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम होगा और लोगों को जाम से काफी हद तक निजात मिलेगी।

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			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका से दोगुनी एलपीजी खरीदेगा भारत</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334978</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 06:01:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय तेल कंपनियां अमेरिका से एलपीजी की खरीद को मौजूदा 22 लाख टन सालाना के स्तर से बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अपने आयात पोर्टफोलियो को विविधता देना और जानबूझकर खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता को कम करना है। अमेरिका से अनुबंधित एलपीजी की मात्रा को दोगुना किया जा &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

भारतीय तेल कंपनियां अमेरिका से एलपीजी की खरीद को मौजूदा 22 लाख टन सालाना के स्तर से बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अपने आयात पोर्टफोलियो को विविधता देना और जानबूझकर खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता को कम करना है।

 

अमेरिका से अनुबंधित एलपीजी की मात्रा को दोगुना किया जा सकता है। इसके साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अन्य बाजारों जैसे अल्जीरिया से भी आपूर्ति की संभावनाएं तलाश रही हैं।

 
<h2 class="wp-block-heading">संकट के समय संकटमोचक बना अमेरिका</h2>
 

भारत ने नवंबर 2025 में अमेरिका के साथ एक साल का स्ट्रक्चर्ड कॉन्ट्रैक्ट किया था, जिसके तहत अनुबंध वर्ष 2026 के दौरान घरेलू रसोई गैस की कुल वार्षिक आवश्यकता का लगभग 10% हिस्सा अमेरिका से आयात किया जाना था।

 

लेकिन मिडिल ईस्ट में संघर्ष छिड़ने के बाद अमेरिका भारत के सबसे बड़े एलपीजी आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनकर उभरा। जब खाड़ी देशों से आने वाले कार्गो फंस गए थे, तब अमेरिकी आपूर्ति ने भारत को एक बेहद जरूरी सुरक्षा कवच प्रदान किया।

 
<h2 class="wp-block-heading">30 दिनों का रणनीतिक भंडार बनाने का लक्ष्य</h2>
 

इस कदम से न केवल घरेलू एलपीजी आवश्यकताओं के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत को भविष्य की किसी भी अनिश्चितता से निपटने के लिए एक रणनीतिक रिजर्व बनाने में भी मदद मिलेगी।

 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसी साल मई में तेल विपणन कंपनियों से एलपीजी का 30 दिनों का रणनीतिक भंडार बनाने के लिए एक कार्ययोजना तैयार करने को कहा था। अमेरिका से अधिक खरीद और अन्य देशों से आपूर्ति की विविधता कंपनियों को इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।

 

यह प्रस्तावित 30 दिनों का रणनीतिक भंडार, तेल कंपनियों द्वारा वर्तमान में घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों की मांग को पूरा करने के लिए रखे जाने वाले 45 दिनों के रोलिंग स्टॉक के अतिरिक्त होगा।

 
<h2 class="wp-block-heading">संकट के दौरान एलपीजी बनी थी बड़ी चिंता</h2>
 

टीओआई के अनुसार, एक तेल कंपनी अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान हम कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर तो आश्वस्त थे, लेकिन एलपीजी हमारे लिए चिंता का एक बड़ा कारण बनी हुई थी। खाड़ी देशों के अलावा दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं जो भारी मात्रा में एलपीजी का उत्पादन करते हैं।

 

हमने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की और संकट के समय अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से आपूर्ति सुरक्षित करने में सफलता हासिल की। अमेरिका के पास भारी मात्रा में अतिरिक्त एलपीजी निर्यात क्षमता है और हम अपनी आपूर्ति में विविधता लाने के लिए इसका लाभ उठा सकते हैं।

 
<h2 class="wp-block-heading">आंकड़ों में समझिए कैसे बढ़ा अमेरिकी एलपीजी का ग्राफ</h2>
 

कमोडिटी डेटा फर्म &#8216;केपलर&#8217; (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय आयात में अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी में तेजी से बदलाव आया है:

 
<figure class="wp-block-table">
<table class="has-fixed-layout">
<thead>
<tr>
<th class="has-text-align-left" data-align="left">समय सीमा</th>
<th class="has-text-align-left" data-align="left">भारतीय एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>वर्ष 2025</strong></td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">8% से भी कम</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>जनवरी 2026</strong> (अनुबंध लागू होने पर)</td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">लगभग 12%</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>फरवरी 2026</strong></td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">13%</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>मार्च 2026</strong> (युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद)</td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">37%</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>अप्रैल 2026</strong></td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">40%</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>मई 2026</strong></td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">55%</td>
</tr>
<tr>
<td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong>जून 2026</strong></td>
<td class="has-text-align-left" data-align="left">65%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</figure>
 

डेटा फर्म केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय आयात में अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी में तेजी से बदलाव आया है।

 
<h2 class="wp-block-heading">व्यापार घाटे को कम करने में मददगार</h2>
 

पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद ऊर्जा अमेरिका से भारत के प्रमुख आयातों में से एक बनकर उभरी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम करने में भी मदद मिली है। अमेरिका और खाड़ी देशों के अलावा भारत ने अपनी एलपीजी आपूर्ति को मजबूत करने के लिए अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे

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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शहरों में बढ़ते तापमान की वजह सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं, कंक्रीट के जंगल ज्यादा जिम्मेदार</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334975</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 05:40:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गर्मियों की दोपहर में भारत के किसी भी शहर में घूमिए तो एक बात तुरंत साफ हो जाती है कि गर्मी सिर्फ सूरज से नहीं आती। यह सड़कों और कंक्रीट की दीवारों से निकलती, कांच की दीवारों से टकराकर वापस आती है और तो और सूरज डूबने के बाद भी गर्मी बनी रहती है। तो &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

गर्मियों की दोपहर में भारत के किसी भी शहर में घूमिए तो एक बात तुरंत साफ हो जाती है कि गर्मी सिर्फ सूरज से नहीं आती। यह सड़कों और कंक्रीट की दीवारों से निकलती, कांच की दीवारों से टकराकर वापस आती है और तो और सूरज डूबने के बाद भी गर्मी बनी रहती है।

 

तो अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island) इफेक्ट में आपका स्वागत है। यह एक ऐसी अनदेखी घटना है जो चुपचाप भारत के शहरों को उनके आस-पास के इलाकों के मुकाबले कई डिग्री ज्यादा गर्म बना रही है।

 
<h2 class="wp-block-heading">शहर समस्या को और गंभीर बना रहे</h2>
 

जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से तापमान बढ़ा रहा है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे अपने शहर ही इस समस्या को और भी गंभीर बना रहे हैं। हम जो इमारतें बनाते हैं, जो सड़कें बनाते हैं, जो पेड़ काटते हैं और यहां तक कि जो सामान चुनते हैं वे सब शहरी भारत को गर्मी जमा करने वाली विशाल जगहों में बदल रहे हैं।

 

और जब तक शहर अपने बढ़ने का तरीका नहीं बदलते, गर्मियां और भी ज्यादा कष्टकारी होती जाएंगी। नेचर सिटीज में प्रकाशित 2024 की एक स्टडी में पाया गया कि अकेले शहरीकरण ने भारतीय शहरों में गर्मी को लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है और तेजी से बढ़ रहे टियर-II शहरों में इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है।

 

स्टडी इस बात पर जोर देती है कि जलवायु परिवर्तन और शहरी विकास अब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे शहरों में गांवों की तुलना में तेजी से गर्मी बढ़ रही है।

 
<h2 class="wp-block-heading">जब शहर ही बन जाते हैं भट्टी</h2>
 

अर्बन हीट आइलैंड (UHI) का असर तब होता है जब शहर प्राकृतिक जगहों की जगह कंक्रीट, डामर, स्टील और कांच का इस्तेमाल करते हैं। ये सतहें दिन के समय सूरज की बहुत ज्यादा गर्मी सोख लेती हैं। उस गर्मी को जल्दी बाहर निकालने के बजाय वे उसे जमा कर लेती हैं और सूरज डूबने के बाद भी घंटों तक उसे वापस छोड़ती रहती हैं।

 

इसमें बाहर गर्म हवा फेंकने वाले हजारों एयर-कंडीशनर, भारी ट्रैफिक, ऊंची इमारतों के बीच हवा का कम बहाव और कम होती हरियाली को जोड़ दें तो शहर एक बड़ी भट्टी की तरह गर्मी को रोकने लगते हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, शहर दुनिया के औसत तापमान बढ़ने की दर से लगभग दोगुनी तेजी से गर्म हो रहे हैं। अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो 2050 तक दुनिया भर में लगभग 1.6 अरब शहरी लोग भीषण गर्मी की चपेट में आ सकते हैं।

 

<em><strong>इसका नतीजा कुछ ऐसा है जिसका अनुभव लाखों भारतीय हर गर्मी में करते हैं।</strong></em>

 

ज्यादा गर्म दिन
ज्यादा गर्म रातें
बिजली का ज्यादा बिल
स्वास्थ्य को ज्यादा जोखिम

 
<h2 class="wp-block-heading">ज्यादा जोखिम में क्यों हैं भारतीय शहर?</h2>
 

भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। हर साल शहर और फैलते जा रहे हैं। इमारतें ऊंची होती जा रही हैं। सड़कें चौड़ी हो रही हैं। हरियाली वाली जगहें कम हो रही हैं। आर्थिक विकास के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी है लेकिन जानकारों का कहना है कि जलवायु के प्रति संवेदनशील भी होना जरूरी है।

 

NAREDCO के प्रेसिडेंट परवीन जैन का मानना है कि अर्बन हीट आइलैंड का असर अब सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी चिंता नहीं रह गया है। वे कहते हैं, &#8220;यह लोगों के रहने के तरीके पर सीधे असर डालता है, जिससे घर के अंदर का तापमान बढ़ता है, बिजली की खपत बढ़ती है और लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है।&#8221;

 
<h2 class="wp-block-heading">क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</h2>
 

उनका मानना है कि समाधान की शुरुआत घर से ही होती है। जैन का कहना है कि सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) को कोई लग्जरी या विलासिता की चीज मानने के बजाय हर नए रिहायशी प्रोजेक्ट को शुरू से ही गर्मी से निपटने के हिसाब से डिजाइन किया जाना चाहिए।

 

इसका मतलब है कि पैसिव कूलिंग, प्राकृतिक हवा-दार घर, ठंडी छतें, बारिश के पानी का संचयन, छत पर सोलर पैनल, पानी सोखने वाली जमीन, गंदे पानी की रीसाइक्लिंग, पेड़-पौधे और ऊर्जा बचाने वाले मटीरियल अब खास या महंगी चीजें नहीं, बल्कि आम सुविधाएं बन जाएंगे और इसका काफी बड़ा फायदा हो सकता है।

 

UNEP के अनुमानों का हवाला देते हुए जैन बताते हैं कि पैसिव कूलिंग के तरीकों से बिजली की खपत 35 प्रतिशत तक कम हो सकती है, घर के अंदर का तापमान लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक घट सकता है और घरों को एयर-कंडीशनिंग के बिना काफी लंबे समय तक आरामदायक बनाए रखा जा सकता है।

 

जैन कहते हैं, &#8220;भारतीय रियल एस्टेट का भविष्य सिर्फ इस बात से नहीं आंका जाएगा कि हम कितने घर बनाते हैं, बल्कि इस बात से आंका जाएगा कि वे घर बदलते मौसम के हिसाब से कितने बेहतर हैं। सस्टेनेबल और जलवायु-अनुकूल आवास अब कोई प्रीमियम सुविधा नहीं रह गई है। यह एक जरूरत बनती जा रही है।&#8221;

 

इसी तरह कांच की इमारतें देखने में भले ही आधुनिक लगें लेकिन वे हमेशा स्मार्ट नहीं होतीं। दशकों तक भारतीय शहरों ने कांच से बनी ऑफिस की इमारतों को आधुनिक आर्किटेक्चर की पहचान के तौर पर अपनाया लेकिन जो चीजें ठंडे पश्चिमी मौसम में काम करती हैं वे अक्सर भारत के गर्म और उमस भरे मौसम में ठीक से काम नहीं करतीं।

 

लोहिया वर्ल्डस्पेस के मैनेजिंग डायरेक्टर पीयूष लोहिया का कहना है कि आर्किटेक्चर के इस ट्रेंड ने अनजाने में ही शहरों को ज्यादा गर्म बना दिया है। उनके अनुसार, घनी बसावट, हरियाली का कम होना और गर्मी सोखने वाली चीजों के ज्यादा इस्तेमाल से शहरी इलाके आस-पास के इलाकों की तुलना में 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकते हैं।

 

कमर्शियल इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लोहिया का कहना है कि कांच के ज्यादा इस्तेमाल वाले बाहरी हिस्से (ग्लास फसाड) सूरज की गर्मी को बहुत ज्यादा अंदर आने देते हैं, जिससे इमारतों को ठंडा रखने के लिए कहीं ज्यादा बिजली की खपत करनी पड़ती है।

 

वे कहते हैं, &#8220;कमर्शियल रियल एस्टेट के भविष्य में सिर्फ दिखावट के बजाय थर्मल क्षमता और उसमें रहने वालों की भलाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।&#8221; उनका तर्क है कि इमारतें सिर्फ शानदार दिखनी ही नहीं चाहिए। उन्हें प्राकृतिक रूप से ठंडा रहना चाहिए। पेड़ सिर्फ सजावट की चीज नहीं हैं, वे बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। कंक्रीट गर्मी सोखता है, जबकि पेड़ उसे दूर करते हैं।

 

केसरी इन्फ्राबिल्ड की मैनेजिंग डायरेक्टर मिनल श्रीनिवासन का मानना है कि डेवलपर्स को सिर्फ इमारतें बनाने से आगे बढ़कर बेहतर शहरी इकोसिस्टम बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके सुझावों में ग्रीन रूफ, वर्टिकल गार्डन, सीढ़ीदार लैंडस्केप, स्पंज पार्क, पानी सोखने वाले फर्श और इकोलॉजिकल कॉरिडोर शामिल हैं।

 

ये उपाय न सिर्फ तापमान कम करते हैं, बल्कि भूजल को फिर से भरने में मदद करते हैं और भारी बारिश के दौरान बाढ़ को भी कम करते हैं। श्रीनिवासन मियावाकी जंगलों का भी जिक्र करते हैं, जो शहरों की छोटी जगहों में घने और स्थानीय पेड़-पौधों वाले जंगल बनाते हैं।

 
<h2 class="wp-block-heading">शहरों को ठंडा रखने के लिए ग्रह को ठंडा रखना जरूरी</h2>
 

अजीब बात यह है कि भीषण गर्मी से बचने के लिए सबसे आम तरीकों में से एक तरीका शहरों को और भी गर्म बना रहा है। एयर-कंडीशनर घर के अंदर की गर्मी को बाहर निकालकर जगह को ठंडा करते हैं। जब लाखों एयर-कंडीशनर एक साथ चलते हैं तो वे बाहर का तापमान बढ़ा देते हैं, बिजली की मांग बढ़ाते हैं और पहले से ही दबाव झेल रहे पावर ग्रिड पर और बोझ डालते हैं।

 

यही वजह है कि UNEP जैसे संगठन जहां भी संभव हो, मैकेनिकल कूलिंग के बजाय पैसिव कूलिंग को अपनाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। प्रकृति पर आधारित समाधान, रिफ्लेक्टिव छतें, छायादार सड़कें, बेहतर शहरी डिजाइन और बेहतर निर्माण सामग्री एयर-कंडीशनर की जरूरत पड़ने से पहले ही गर्मी को कम कर देते हैं।

 
<h2 class="wp-block-heading">कैसे होने चाहिए अगली पीढ़ी के घर?</h2>
 

अर्बन हीट आइलैंड का असर होना कोई जरूरी बात नहीं है। यह मुख्य रूप से डिजाइन से जुड़ी समस्या है। इसका मतलब है कि इसका समाधान भी डिजाइन के जरिए ही निकाला जा सकता है। जिन शहरों में ज्यादा पेड़-पौधे होते हैं, वे ज्यादा ठंडे रहते हैं।

 

स्थानीय मौसम के हिसाब से डिजाइन की गई इमारतें कम ऊर्जा की खपत करती हैं। पानी सोखने वाली सड़कें बाढ़ को कम करती हैं और सतह के तापमान को भी घटाती हैं। सफेद या रिफ्लेक्टिव छतें सूरज की रोशनी को सोखने के बजाय वापस वातावरण में लौटा देती हैं। इनमें से कोई भी विचार भविष्य की कल्पना नहीं है, ज्यादातर तो पहले से ही मौजूद हैं।

 

चुनौती यह है कि भारत में शहरों के तेजी से फैलने और दशकों तक गर्मी बढ़ने की स्थिति बनने से पहले ही इन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जाए। क्योंकि अगली हीटवेव सिर्फ ग्लोबल क्लाइमेट चेंज से ही तय नहीं होगी, बल्कि उन शहरों से भी तय होगी जिन्हें हम बसाएंगे।

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			</item>
		<item>
		<title>आज से छह देशों की यात्रा पर रवाना होंगे विदेश मंत्री जयशंकर</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334950</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:43:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.haqeeqattoday.com/?p=334950</guid>

					<description><![CDATA[<p>विदेश मंत्री एस.जयशंकर रविवार से कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका की यात्रा पर रवाना होंगे। पांच से 10 जुलाई तक चार खाड़ी देशों कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान की जयशंकर की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हालात तेजी से बदल &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>विदेश मंत्री एस.जयशंकर रविवार से कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका की यात्रा पर रवाना होंगे।</p>
<p>पांच से 10 जुलाई तक चार खाड़ी देशों कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान की जयशंकर की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी देशों का अपना दौरा पूरा करने के बाद, वह 13 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करने न्यूयॉर्क जाएंगे।</p>
<p>यात्रा के अंतिम चरण में जयशंकर तीसरी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स जाएंगे।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे।</p>
<p>इन देशों की यात्रा के दौरान वह अपने समकक्षों और वहां के नेताओं से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा चारों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर केंद्रित होगी। इससे क्षेत्रीय घटनाक्रमों तथा आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें: रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक आज</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334889</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 08:05:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.haqeeqattoday.com/?p=334889</guid>

					<description><![CDATA[<p>रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है। इनमें हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल, वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम), स्यूडो सैटेलाइट और ड्रोन रोधी प्रणालियां प्रमुख हैं। इन प्रस्तावों के लागू होने से तीनों &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।</p>
<p>इनमें हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल, वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम), स्यूडो सैटेलाइट और ड्रोन रोधी प्रणालियां प्रमुख हैं। इन प्रस्तावों के लागू होने से तीनों सेनाओं की मारक क्षमता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।</p>
<p>कई महीनों बाद हो रही इस बैठक में चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन पहली बार अपने नए पद पर शामिल होंगे।</p>
<h2 class="wp-block-heading">स्वदेशी एमपी-एटीजीएम पर सबसे ज्यादा जोर</h2>
<p>बैठक में डीआरडीओ द्वारा विकसित मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है। करीब 2,600 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत सेना को 100 लांचर, 2,300 मिसाइलें और पांच सिमुलेटर मिलेंगे। इनका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करेगी, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी भागीदारी प्रस्तावित है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">राफेल और तेजस की ताकत बढ़ाएंगी हैमर मिसाइलें</h2>
<p>डीएसी के सामने करीब 600 हैमर प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। लगभग 2,400 करोड़ रुपये की लागत वाली इन मिसाइलों का निर्माण फ्रांस की सैफरन कंपनी और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सहयोग से भारत में किया जाएगा।</p>
<p>इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना के राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान लैस होंगे, जबकि नौसेना इन्हें राफेल-एम विमानों के लिए इस्तेमाल करेगी। गलवान संघर्ष के बाद इन मिसाइलों को आपात खरीद के तहत भी शामिल किया गया था।</p>
<h2 class="wp-block-heading">वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा</h2>
<p>थलसेना के लिए रूसी मूल के वर्बा वेरी शार्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वी-शोर्ड्स) की खरीद पर भी मुहर लग सकती है। यह मौजूदा इगला मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान, हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका उत्पादन भारत में अडाणी डिफेंस करेगी।</p>
<h2 class="wp-block-heading">ड्रोन और स्यूडो सैटेलाइट पर भी फैसला संभव</h2>
<p>बैठक में साफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, कामिकाजी ड्रोन, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, स्कार्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों से जुड़े उपकरण, फिक्स्ड-विंग स्यूडो सैटेलाइट और नेवल शिपबोर्न एरियल सिस्टम जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।</p>
<p>इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने पर भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी, वायु रक्षा और सटीक हमले की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।</p>
<p>The post <a href="https://www.haqeeqattoday.com/news/334889">भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें: रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक आज</a> appeared first on <a href="https://www.haqeeqattoday.com">Haqeeqat Today</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी</title>
		<link>https://www.haqeeqattoday.com/news/334886</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Haqeeqat Today Web]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 07:39:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.haqeeqattoday.com/?p=334886</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर जाने वाले है। इस बात की जानकारी खुद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम ने दी। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://www.haqeeqattoday.com/news/334886">अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी</a> appeared first on <a href="https://www.haqeeqattoday.com">Haqeeqat Today</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर जाने वाले है। इस बात की जानकारी खुद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम ने दी। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं।</p>
<p>बता दें कि पीएम मोदी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। इसके इतर दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौता (FTA) के बाद इस दौरे को बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">न्यूजीलैंड के पीएम लक्सम ने क्या कहा?</h3>
<p>न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो न्यूजीलैंड की आर्थिक तरक्की के लिए बहुत मायने रखता है।</p>
<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत-न्यूजीलैंड समझौते पर भी बोले लक्सम</strong></h3>
<p>लक्सम ने आगे कहा कि अप्रैल में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के रिश्ते अगले स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे न्यूजीलैंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निर्यात बढ़ेगा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। साथ ही, न्यूजीलैंड के व्यापारियों के लिए भारत के 1.4 अरब (140 करोड़) लोगों का एक बहुत बड़ा बाजार खुल जाएगा।</p>
<h3 class="wp-block-heading">15 सालों में ₹1.6 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का लक्ष्य</h3>
<p>गौरतलब है कि इससे पहले, मई महीने में न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस समझौते के बाद दोनों देशों का आपसी व्यापार कुछ ही सालों में दोगुना हो जाएगा। न्यूजीलैंड सरकार अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>इस निवेश को आसान और तेज बनाने के लिए भारत सरकार एक विशेष ‘न्यूजीलैंड सिंगल डेस्क’ बनाने पर सहमत हुई है। इससे न्यूजीलैंड के निवेशकों को भारत में सरकारी मंजूरियां बहुत जल्दी और आसानी से मिल सकेंगी।</p>
<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता</strong></h3>
<p>गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड ने अप्रैल 2026 में इस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए थे। यह सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा समझौता है। इससे दोनों देशों के निर्माताओं, किसानों, छोटे उद्योगों, महिला उद्यमियों, छात्रों और कुशल पेशेवरों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p>इसके तहत बाजार पहुंच, कृषि उत्पादकता, निवेश, टैलेंट मोबिलिटी (नौकरी के लिए आना-जाना), खेल, पर्यटन और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
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