जन्मदिन विशेष: ऐसे ही नहीं बनीं शबनम से शब्बो, लोगों की गालियों ने ‘बिंदु’ को बनाया

बॉलीवुड में एक वो दौर भी था जब नायक की अपेक्षाकृत खलनायक ज्यादा लोकप्रिय होते थे. अभिनेता अजीत, प्राण, अमजद खान और भी कई ऐसे खलनायक हैं जिनको लोगों ने पसंद किया यहीं नहीं उनके बोले गए डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं. वहीं अगर हम खलनायिका की बात करें तो उनमें अदाकार ‘बिंदू’ का नाम भी सामने आता है जिन्होंने क्रूर महिला के किरदार के रूप में अपनी पहचान बनाई. लेकिन इस क्रूर महिला की निजी जिंदगी आसान नहीं थी. उन्होंने कई दुख देखे. एक इंटरव्यू में बिंदू ने बताया, उनका जन्म गुजराती परिवार में हुआ था. उनके पिता नानक भाई अपने भाई के साथ मिलकर फिल्में बनाते थे. फिल्मी माहौल होने के बावजूद उन्हें फिल्में देखने की मनाही थी. उन्हें इस परिवेश से दूर रखा जाता था. बिंदू को बचपन से ही डांस का बहुत शौक था. उन्होंने भरतनाट्‍यम और कत्थक सीखा. नृत्य का उनपर इस कदर जुनून था कि वे एक कमरे से दूसरे कमरे तक भी डांस करते हुए जाती थीं. उनकी मां ज्योत्सना स्टेज आर्टिस्ट थीं. 17 अप्रैल को बिंदु का बर्थडे है.

मरने से पहले पिता ने लिया वादा

बिंदू घर में भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं और 13 साल की उम्र में अचानक उनके पिता का देहांत हो गया. अस्पताल में मरने से पहले उनके पिता ने बिंदू से एक वादा लिया कि बाद में वो अपने भाई-बहन की जिम्मेदारी लेगी और उनका पूरा ध्यान रखेगी और तेरा ध्यान ये बुड्ढा रखेगा. असल में वे शिर्डी के साईंबाबा को बुड्ढा कहते थे. 13 साल की उम्र. सिर पर बाप का साया नहीं. सोचिए मेरी हालत उस वक्त क्या होगी. मैं पैसा कमाने के लिए मॉडलिंग करने लगी. फिर मुझे 1962 में मोहन कुमार की सुपरहिट फिल्म ‘अनपढ़’ में काम करने का मौका मिला.

ऐसे हुई थी शादी

बिंदू ने जिंदगी को सही रास्ते पर चलाने के लिए काफी मेहनत की. उन्हें कहीं काम नहीं मिला. वे पूरी तरह निराश हो गई थीं. इस बीच उनकी मुलाकात चंपक लाला झवेली से हुई. उनकी बहन बिंदू की खास दोस्त थी इसलिए उनके घर आना-जाना होता रहता था. लेकिन जब उनके घरवालों को इस प्रेम प्रसंग के बारे में पता चला तो उन्होंने पाबंदिया लगानी शुरू कर दी. लेकिन बिंदू ने भी हार नहीं मानी और आखिरकार 1964 में दोनों की शादी हो गई. उसके बाद चंपक के घरवालों ने बातचीत बंद कर दी और पतिदेव को पुश्तैनी बिजनेस से भी बेदखल कर दिया गया. बिंदू ने भी इस शर्त पर शादी की कि वो अपने भाई-बहनों को नहीं छोड़ेगी. चंपक समझदार थे वे अपना घर छोड़कर हमारे साथ रहने लगे.

ऐसे मिला फिल्मों में काम

बिंदू ने एक इंटरव्यू में बताया कि एक बार वे अपने किसी पारिवारिक मित्र के यहां पार्टी में गए. साथ में छोटी बहन भी थी. उस पार्टी में ख्यात संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल भी आए हुए थे. मेरी बहन उनको बेहद पसंद आई. उसके बाद उन्होंने हमारे घर आना शुरू कर दिया और बिंदू की छोटी बहन की शादी उनसे हो गई. एक रात बहुत देर हो गई, वे नहीं आए, तब मैं अपनी बहन के साथ स्टूडियो पहुंची. वे एक फिल्म के म्यूजिक में व्यस्त थे. वहां राज खोसला भी थे. उन्होंने बताया कि वे एक फिल्म में मुझे कास्ट करना चाहते हैं. फिल्म का नाम है दो रास्ते. निगेटिव रोल है. मैं तुरंत काम करने के लिए तैयार हो गई. ये फिल्म सुपरहिट हुई और इस तरह मेरी गाड़ी पटरी पर आ गई. मुझे जो गालियां पड़ती थीं वही मेरे लिए तारीफ़ होती थी. लोगों की गालियों ने ही मुझे बनाया.

‘मेरा नाम है शबनम प्यार से लोग मुझे कहते हैं शब्बो’ 

इस गाने के बारे में जिक्र करते हुए बिंदु ने कहा, उस गाने में भी मेरा निगेटिव किरदार था. इस गाने में मैंने पहली बार कैबरे किया था. फिल्म ‘दो रास्ते’ के बाद मुझे एक बार शक्ति सामंत ने बुलवाया कहा, मैं फिल्म ‘कटी पतंग’ बना रहा हूं. उसमें एक कैबरे के लिए तुमको रोल देना चाहता हूं. मैंने कहा, मुझे कैबरे नहीं आता. फिर सामंत ने कहा कि बिंदु तेरे लिए कुछ भी असंभव नहीं है. तुझे ये रोल करना ही है. फिर मैंने कैबरे के लिए हां कह दिया. मैंने बहुत प्रैक्टिस की. जब मैंने गाना देखा तो मुझे अच्छा नहीं लगा. मैंने उन्हें कहा, कि दोबारा करते हैं मैं इससे अच्छा कर सकती हूं. लेकिन उन्होंने कहा, नहीं बिंदु देखना ये लोगों को कितना पसंद आएगा. और वही हुआ. इस गाने ने इतिहास रचा. एक दिलचस्प वाकया बताते हुए बिंदु ने कहा, एक दूसरी फ़िल्म के गाने में उन्हें बर्फ़ पर नाचना था. लेकिन शिमला जैसी बर्फ दिखाने के लिए नमक बिछाया गया था. मई का महीना था. गर्मी बहुत थी. उन पर नाचने से मेरे दोनों घुटने छिल गए. इससे स्टॉकिंग उस हिस्से पर चिपक जाते थें. दांत भींचकर मैं रात को स्टॉकिंग निकालती थी. फिर डॉक्टर आकर इंजेक्शन देते थे.

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