
उत्तराखंड में वन भूमि आवंटन की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मई में सभी राज्यों को एसआईटी गठन के आदेश दिए थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद प्रदेश में वन भूमि आवंटन की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई हैं। सभी जिलों में यह एसआईटी जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में काम करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में पुणे में आरक्षित वन भूमि से जुड़े मामले में सभी राज्यों के लिए महत्वपूर्ण आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में मुख्यमंत्री धामी के अनुमोदन के बाद राज्य में राजस्व विभाग के अधीन आरक्षित वन भूमि, जो कि किसी अन्य प्राईवेट संस्थाओं को गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित की गई है, की जांच के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच टीमों का गठन किया गया है।
पिछले साल मई में दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को यह पता लगाने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था कि क्या कोई आरक्षित वन भूमि गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र को आवंटित की गई है। राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को ऐसी भूमि का कब्जा वापस लेने और उसे वन विभाग को सौंपने का भी निर्देश दिया था।
पीठ ने कहा था कि यदि यह पाया जाता है कि भूमि का कब्जा वापस लेना व्यापक जनहित में नहीं होगा तो सरकारों को उक्त भूमि की कीमत उन व्यक्तियों, संस्थाओं से वसूलनी चाहिए, जिन्हें वह भूमि आवंटित की गई है। वसूली से प्राप्त राशि का इस्तेमाल वनों के विकास के लिए करना चाहिए। एसआईटी गठन के लिए एक साल का समय दिया गया था।