बिहार: राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए NDA में जबरदस्त जोर आजमाइश

बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एक सीट के लिए एनडीए में घमासान जारी है। एक सीट के लिए तीनों छोटे सहयोगियों ने दावा ठोका है।

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने जा रहे चुनाव में एक सीट के लिए राजग में जबर्दस्त खींचतान मची हुई है। भाजपा, जदयू के हिस्से की चार सीटों के बाद बच रही एक सीट के लिए राजग के तीनों छोटे सहयोगियों हम, आरएलएम व लोजपा (आर) ने दावा ठोक दिया है। हम और आरएलएम भाजपा को पुराना वादा याद दिला रहे हैं, जबकि लोजपा (आर) अपने 19 वोटों का हवाला देकर एक सीट पर दावा जता रही है।

पूरे मामले में पेच यह है कि जदयू और हम के मुखिया जीतनराम मांझी लोजपा (आर) को सीट देने पर सहमत नहीं है। दूसरी ओर भाजपा आरएलएम के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र को बिहार सरकार में मंत्री बनाने, विधान परिषद की सीट देने के बाद उन्हें और उपकृत करने के मूड में नहीं है। हालांकि मांझी और कुशवाहा दोनों का दावा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे के दौरान भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा की एक सीट देने का वादा किया था।

जदयू में उम्मीदवारी पर मशक्कत
जदयू के जो दो सांसद रिटायर हो रहे हैं उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर हैं। माना जा रहा है कि ईबीसी से जुड़े ठाकुर चूंकि मंत्री हैं, ऐसे में सीएम नीतीश उन्हें तीसरा कार्यकाल दे सकते हैं। दूसरे चेहरे के रूप में जदयू पार्टी महासचिव मनीष वर्मा को मौका दे सकती है। हालांकि इस दौर में आरसीपी सिंह भी हैं। सिंह, कुशवाहा भाजपा के लगातार संपर्क में हैं।

क्या है पांचवीं सीट का गणित
एक सीट पर जीत के लिए 40.5 मतलब 41 मतों की जरूरत है। संख्या बल की दृष्टि से भाजपा (89) और जदयू (85) को दो-दो सीट मिलनी तय है। इसके बाद राजग के पास अतिरिक्त 38 वोट होंगे। इस प्रकार पांचवीं सीट के लिए राजग को 3 अतिरिक्त वोट का जुगाड़ करना होगा। दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन के पास 35 सीटें हैं, जो जरूरी वोट से 6 कम हैं। ऐसे में विपक्ष एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 वोट के बगैर जीत नहीं सकती।

राजग आश्वस्त क्यों?
राजग तीन अतिरिक्त मत हासिल करने के प्रति आश्वस्त है। भाजपा सूत्रों का कहना है बसपा का इकलौता विधायक और कांग्रेस (6) के कुछ विधायक मददगार साबित हो सकते हैं। दूसरी ओर राजद की रणनीति दिवंगत बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब के बहाने एआईएमआईएम को साधने की है। हालांकि इनकी कमजोर कड़ी कांग्रेस और बसपा है।

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