इंदौर: जहरीले पानी से 15 लोगों की मौत, 200 से ज्यादा करा रहे इलाज

भागीरथपुरा हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त निर्णय लिया है। इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आयुक्त नगर निगम दिलीप यादव को हटाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 200 से अधिक लोग अभी-भी इलाजरत हैं।

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में आ गए हैं। इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के बाद उन्होंने अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया है। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है।

वहीं, इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए गए। बता दें सिसोनिया को इंदौर से भोपाल ट्रांसफर कर मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया था। वहीं, 200 से अधिक लोग अभी-भी इलाजरत हैं।

बता दें इससे पहले इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने नगर निगम में एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए तीन IAS अधिकारियों को अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया है।

सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी आदेश में दो डायरेक्टर आईएएस और एक प्रमोटी आईएएस को नगर निगम इंदौर में पदस्थ किया है। इसमें 2019 बैच के आईएएस और खरगोन में सीईओ आकाश सिंह को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। साथ ही 2020 के आईएएस और आलीराजपुर में सीईओ प्रखर सिंह और 2020 बैंच के ही आईएएस और इंदौर में उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त् बनाया गया है। वहीं, 2017 बैंच के आईएएस इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को हटा कर मध्य प्रदेश शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का उप सचिव बनाया गया ।

भागीरथपुरा में हुई घटना में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों की समीक्षा की थी। इसके बाद शासन स्तर पर निर्णय लेते हुए नगर निगम की प्रशासनिक टीम में बदलाव किए गए। नगर निगम में एक साथ तीन IAS अधिकारियों की नियुक्ति को सरकार की ओर से प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई टीम के माध्यम से निगम के कामकाज, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शुक्रवार को देररात प्रदेश के सभी नगर पालिक निगम के महापौर के साथ-साथ संभागायुक्त, कलेक्टर और कमिश्नर नगर निगम के साथ बैठक लेकर नागरिकों को साफ़ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के नगरीय निकायों का अमला जनता की सेहत के प्रति सजग और सतर्क रहे। इंदौर में हुई घटना की किसी अन्य जगह पुनरावृत्ति नहीं होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के तालमेल में कमी नहीं होना चाहिए।

पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में प्रशासनिक अधिकारी फोन या अन्य माध्यम से शिकायत की सूचना मिलने पर तत्काल कदम उठाएं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नागरिकों को साफ़ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश जारी कर बैठक में जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिशा-निर्देश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।

नागरिकों को साफ़ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जारी दिशानिर्देश
सघन आबादी अथवा 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाईपलाईन का चिन्हांकन।
पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाईपलाईन, नालियों/सीवर पाईपलाईन के समीप अथवा नीचे से गुजरने वाली पाईपलाईनों का चिन्हांकन।
चिन्हांकन में पाये गये रिसाव का 48 घंटे के भीतर मरम्मत सुनिश्चित।
जल शोधन संयंत्र (WTP)तथा उच्च स्तरीय टंकियॉं (OHT’s)/ Sump Tanks की साफ-सफाई का 07 दिवस के अंदर निरीक्षण।
सभी जल शोधन संयंत्रों (WTP’s), प्रमुख जल स्त्रोतों तथा उच्च स्तरीय टंकियों (OHT’s)/ Sump Tanks पर तत्काल जल नमूना परीक्षण।
प्रदूषण पाए जाने पर तत्काल जल आपूर्ति रोकी जाये एवं वैकल्पिक सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाये
Chlorination systemकी 24×7 निगरानी की जाये।
सभी नगरीय निकायों में Pipeline Leakage Detection के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जाये।
जल आपूर्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों को Emergency Categoryमें रखा जाये।
लीकेज/दूषित जल शिकायतों का 24 से 48 घंटों के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाये।
सी.एम. हेल्पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाये।

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