चेक गणराज्य में फिर सत्ता में लौटे आंद्रेज बाबिस को पीएम मोदी की बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (09 दिसंबर) को अंद्रेज बाबिस को चेक गणराज्य का नया प्रधानमंत्री नियुक्त होने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि भारत व चेकिया के बीच सहयोग और मित्रता को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति पर अंद्रेज बाबिस को बधाई। भारत और चेकिया के बीच सहयोग और दोस्ती को और गहरा करने के लिए मिलकर काम करने की आशा करता हूं।” फिर सत्ता में आए आंद्रेज बाबिस बाबिस इससे पहले 2017 से 2021 तक चेक प्रधानमंत्री रह चुके हैं, और हालिया चुनावों में जीत के बाद वे दोबारा सत्ता में लौटे हैं। बाबिस ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के साथ राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। शपथ लेते समय बाबिस ने कहा कि वे देश के हितों की रक्षा दुनिया में कहीं भी करेंगे और चेक गणराज्य को धरती पर रहने के लिए सबसे बेहतर जगह बनाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। बता दें कि अक्टूबर में हुए चुनावों में उनकी पार्टी एएनओ ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं और दो अन्य दलों एंटी-माइग्रेंट फ़्रीडम एंड डायरेक्ट डेमोक्रेसी और राइट-विंग मोटरिस्ट्स फॉर देमसेल्व्स के साथ मिलकर बहुमत वाली गठबंधन सरकार बनाई है। राष्ट्रपति पेत्र पावेल ने उन्हें नई सरकार बनाने का निमंत्रण दिया है। समझौते के तहत 16 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 8 मंत्रालय एएनओ के पास होंगे। बाकी मंत्रालय सहयोगी दल संभालेंगे। 108 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में नए गठबंधन के पास 200 सदस्यीय सदन में 108 सीटें हैं, जिससे पूर्व प्रधानमंत्री पेत्र फियाला की केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार अब विपक्ष में चली जाएगी। यह राजनीतिक बदलाव यूरोप में नए गठजोड़ की ओर ईशारा करता है, क्योंकि नई सरकार के रुख को हंगरी और स्लोवाकिया की नीतियों के करीब माना जा रहा है, विशेषकर यूक्रेन और यूरोपीय संघ से जुड़े मुद्दों पर। वहीं हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने बाबिस की वापसी का स्वागत करते हुए कहा, “एक पुराना साथी वापस आया है। स्वागत है!” हालांकि बाबिस पर अब भी यूरोपीय संघ की सब्सिडी से जुड़े कथित घोटाले के मामले में आरोप हैं और केस आगे बढ़ाने के लिए संसद को उनकी प्रतिरक्षा हटानी होगी। 2021 के चुनाव में हार और राष्ट्रपति पद की दौड़ में पावेल से मात खाने के बाद बाबिस की यह वापसी चेक राजनीति में बड़ा परिवर्तन मानी जा रही है।
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