यूपी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान निवेश प्रस्तावों को योगी सरकार भूमि में उतारने को तैयार, ऐसे करेगी निवेश

लखनऊ। योगी सरकार अपने सबसे बड़े आयोजन यूपी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हस्ताक्षरित निवेश प्रस्तावों को धरातल पर लाने को तैयार है। इसके लिए करीब 52 हजार करोड़ रुपये के 54 निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए सहमति बन गई है। मुख्यमंत्री कर्नाटक के पहले चरण के दौरे के बाद इन निवेश प्रस्तावों का शिलान्यास कर सकते हैं। इन औद्योगिक इकाइयों के स्थापित होने पर तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मालूम हो कि 21-22 फरवरी को इन्वेस्टर्स समिट में देश के दिग्गज औद्योगिक घरानों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान 4 लाख 68 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आये। मुख्यमंत्री हर महीने कम से कम 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का शिलान्यास की पहले ही घोषणा कर चुके हैं।

पहला चरण धरातल पर उतारने की योजना

पहले चरण में जिन औद्योगिक समूहों के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की योजना है उनमें रिलायंस जिओ, आदित्य बिरला, टीसीएस, इंफोसिस, वल्र्ड ट्रेड सेंटर, परम इंडिया, हल्दीराम, फ्यूचर च्वाइस, एसीसी, यश पेपर और डीसीएम श्रीराम आदि प्रमुख हैं। पहले चरण में निवेश करने जा रहे अधिकांश निवेशक नोएडा, गाजियाबाद और उसके आसपास के इलाकों में इकाइयां लगाने के इच्छुक हैं, पर इनमें से कुछ निवेश इलाहाबाद, बाराबंकी, शाहजहांपुर, हरदोई, संतकबीरनगर, एटा, फैजाबाद, गोरखपुर, हरदोई, कानपुर, मेरठ, बिजनौर, लखनऊ, बस्ती, मुजफ्फरनगर और रायबरेली के हिस्से में भी आया है।

जांच में सही पाये गए सभी एमओयू

यूपी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान निवेश के लिए हिए अनुबंध व्यावहारिक पाये गए हैं। इन्वेस्टर्स समिट के बाद अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आइआइडीसी) डॉ.अनूप चंद्र पांडेय ने बताया था कि प्रदेश में निवेश के लिए हुए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का सरकार सत्यापन कराएगी। सरकार यह देखेगी कि निवेशकों ने एमओयू के माध्यम से निवेश का जो दम भरा है, उसे जमीन पर उतारने का उनमें वाकई दमखम है या नहीं। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि एमओयू करने वाली कंपनियां या निवेशक कहीं बैंकों के डिफाल्टर तो नहीं हैं। विभागों से कहा गया था कि अपने से संबंधित एमओयू को परख लें। कंपनियों का लाइन ऑफ बिजनेस और टर्नओवर देखें। मूल्यांकन करें कि उसने जिस प्रोजेक्ट के लिए एमओयू किया है, अपने टर्नओवर और माली हैसियत के हिसाब से अंजाम देने की कूवत है या नहीं। एमओयू की जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को भी सौंपी गई थी क्योंकि निवेशकों ने जिलाधिकािरयों की मौजूदगी में साइन किये थे। आइआइडीसी ने बताया कि सत्यापन में सभी एमओयू व्यावहारिक हैं। 

मुख्यमंत्री भी रखेंगे एमओयू पर नजर

समिट के दौरान हुए एमओयू को हकीकत में बदलने की प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगाहें भी होंगी। एमओयू की मुख्यमंत्री निगरानी कर सकें, इसके लिए अलग से डैशबोर्ड होगा। एमओयू को जमीन पर उतारने और उनकी ट्रैकिंग करने के सिलसिले में आइआइडीसी ने गुरवार को योजना भवन में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि सभी एमओयू को अब वेबपोर्टल पर अपलोड कराया जा रहा है ताकि उनकी ट्रैकिंग हो सके। इसके लिए एमओयू ट्रैकर नामक नया वेबपोर्टल विकसित किया गया है। विभागों के अपर मुख्य सचिवों/प्रमुख सचिवों/सचिवों से कहा गया है कि वे महकमे से संबंधित एमओयू को पोर्टल पर अपलोड कराएं। आइआइडीसी इसकी निगरानी करेंगे। एमओयू की निगरानी के लिए सीएम डैशबोर्ड भी होगा जो इस पोर्टल से लिंक होगा।  

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