ईरान युद्ध के बीच भारत ने रूस से खरीदा रिकॉर्ड तेल

मार्च 2026 में भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में करीब 90% बढ़ गई, जबकि पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के कारण कुल कच्चे तेल का आयात लगभग 15% घट गया।

होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण मार्च में भारत के एलपीजी आयात में 40% की गिरावट आई। प्राकृतिक गैस की खेप में भी कमी दर्ज की गई, जिससे नई दिल्ली को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी।

रिटोइया ने आगे कहा कि रूसी तेल की खरीद अप्रैल में भी जारी रहने की उम्मीद है। साथ ही ईरानी तेल खरीदने की भी संभावना है। अप्रैल से भारत को वेनेजुएला से भी तेल मिलना शुरू हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े कुछ जोखिम कम होने की उम्मीद है।

रूस से आयात में तेजी की वजह

दिसंबर 2025 और जनवरी-फरवरी 2026 में कम खरीद के बाद रूस से आयात में तेजी आई। इसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की छूट थी, जिसके तहत समुद्र में पहले से मौजूद, प्रतिबंधों के दायरे वाले रूसी तेल को खरीदने की अनुमति मिल गई। अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से भी तेल आयात बढ़ा, हालांकि कुल आपूर्ति में इनका योगदान अभी भी कम रहा।

मध्य-पूर्व से पाइपलाइनों के जरिए सप्लाई

ग्लोबल डेटा एनालिटिक्स फर्म केपर के मुख्य विश्लेषक सुमित रिटोइया ने कहा कि मध्य-पूर्व के उत्पादक अपनी आपूर्ति का कुछ हिस्सा पाइपलाइनों के जरिए भेज रहे हैं, जो होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करती हैं। खासतौर पर सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट (यानबू) पाइपलाइन और UAE की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन का इस्तेमाल हो रहा है।

इन पाइपलाइनों से कुछ हद तक राहत मिली है, जिससे भारत समुद्री बाधाओं के बावजूद इस क्षेत्र से कुछ मात्रा में तेल खरीदना जारी रख पा रहा है।

कतर से LNG आपूर्ति में 92% गिरावट

कतरएनर्जी द्वारा फोर्स मेज्योर घोषित करने और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण फरवरी की तुलना में भारत को कतर से मिलने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति में 92% की भारी गिरावट आई। कतरएनर्जी के नई दिल्ली के साथ लंबे समय के अनुबंध हैं। इस कमी की कुछ हद तक भरपाई अमेरिका, ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से बढ़े आयात से हुई।

एलपीजी आयात में आई भारी गिरावट की कुछ हद तक भरपाई घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति सीमित करके की गई। इसका मकसद 33.2 करोड़ से ज्यादा घरेलू ग्राहकों के लिए खाना पकाने वाली गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

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