डॉक्टर से जानें किन-किन आदतों से ब्रेन को होता है नुकसान

जिम जाकर शरीर को फिट रखना तो हम सब जानते हैं, लेकिन दिमाग का क्या जो पूरे शरीर को चलाता है? अनजाने में हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें हमारे दिमाग को तेजी से बूढ़ा कर रही हैं, यहां तक कि उसका आकार भी सिकोड़ रही हैं। खराब नींद, बढ़ता तनाव और हाई ब्लड शुगर सीधे हमारी याददाश्त और फोकस पर वार कर रहे हैं। दिमाग को लंबे समय तक तेज और स्वस्थ कैसे रखा जाए, इस पर डॉ. कुणाल सूद ने कुछ बेहद जरूरी फैक्ट्स शेयर किए हैं। आइए जानते हैं वो बातें जो आपके दिमाग की सेहत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। नींद की कमी और सिकुड़ता दिमाग क्या आप जानते हैं कि खराब नींद आपके दिमाग के आकार को छोटा कर सकती है? रिसर्च बताती है कि नींद की कमी से दिमाग के ग्रे मैटर की मात्रा कम हो जाती है और हिप्पोकैम्पस सिकुड़ने लगता है। साथ ही, नींद की कमी के कारण दिमाग में जमा होने वाले जहरीले कचरे जैसे बीटा-एमाइलॉयड की सफाई नहीं हो पाती, जिससे याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। क्रॉनिक स्ट्रेस लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे आपके हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर हमला करता है। समय के साथ, यह तनाव फोकस को कम करता है, फैसले लेने की क्षमता को कमजोर करता है और दिमाग में सूजन बढ़ाता है। अगर तनाव लंबा खिंचे, तो यह नसों के बीच होने वाले आपसी संकेतों को भी बाधित कर देता है। ब्लड शुगर हाई ब्लड शुगर सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी खतरनाक है। ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने से दिमाग के वॉल्यूम में कमी आती है और छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है। यह स्थिति दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करता है, जिससे सोचने-समझने की शक्ति समय से पहले ही कम होने लगती है। ओमेगा-3 और क्रिएटिन दिमाग को हेल्दी बनाए रखने के लिए सही पोषक तत्व जरूरी हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग के सेल्स की मेमब्रेन को मजबूत बनाने और सूजन कम करने में मदद करता है, जिससे याददाश्त बेहतर होती है। वहीं, क्रिएटिन दिमाग के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है। यह तनाव या थकान के दौरान भी दिमाग की सेहत को बनाए रखने में मददगार साबित होता है।
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