सेहत बनाने जिस ‘पार्क’ में जाते हैं आप, वहीं तो नहीं मंडरा रहा बीमारियों का खतरा?

पार्क शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हमें प्रकृति में अधिक समय बिताने की अनुमति देते हैं, लेकिन कई बार पार्क संक्रामक बीमारियों के फैलने के लिए भी आदर्श वातावरण होते हैं। पार्कों में कई बीमारियां संक्रमित जानवरों के संपर्क से लेकर मच्छरों, कीड़े व पिस्सू के कारण हो सकती हैं। कुछ बीमारियां केवल हल्के लक्षण पैदा करती हैं, जबकि अन्य गंभीर या जीवन भर के लिए परिणाम दे सकती हैं।

पार्कों और बीमारियों के बीच क्या संबंध है?
अगर आप नियमित रूप से पार्कों का दौरा करते हैं, तो शोध सुझाव देता है कि कई ऐसे कारक हैं जो आपकी बीमारी के संपर्क को बढ़ा सकते हैं। यहां तीन प्रमुख कारक हैं।

घरेलू पालतू जानवर : अध्ययन से पता चलता है कि घरेलू जानवर जैसे कि बिल्लियां और कुत्ते बीमारी को लेकर खतरा हो सकते हैं। इसका एक कारण यह है कि जब वे पार्कों और सार्वजनिक बागों में मल त्याग करते हैं, तो वे अक्सर मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर देते हैं। घरेलू पालतू जानवर राउंडवार्म भी ले जा सकते हैं। यह जानवरों की आंतों को संक्रमित करता है। शोध से पता चलता है कि उन पार्कों में अधिक राउंडवार्म पाते हैं जहां बिल्लियां और कुत्ते मौजूद होते हैं। यह विशेष रूप से चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक है। ये छोटे बच्चे अक्सर मिट्टी खाते हैं।

फूड वेस्ट : खाद्य संबंधित अपशिष्ट, जैसे कि बिना ढके कचरे के डिब्बे बीमारी के एक और स्रोत हैं। यदि सही तरीके से न निपटाया जाए, तो खाद्य अपशिष्ट चूहों, कुत्तों और अन्य जानवरों को आकर्षित कर सकते हैं। ये पार्क में आने वालों को नई बीमारियों के संपर्क में ला सकते हैं।

बीमारियां फैलाने वाले कीड़े और परजीवी : मच्छर और किलनी सामान्य रोग वाहक हैं या जीवित जीव जो एक संक्रमित व्यक्ति या जानवर से दूसरे में रोग ले जाते हैं। पार्कों और हरे स्थानों में मच्छर मुख्य चिंता का विषय हैं।

हम क्या कर सकते हैं?
स्वास्थ्य के कारण पार्क से बचना नहीं चाहिए, भले ही वे बीमारियों का आश्रय हो सकते हैं। इसके बजाय हमें पार्कों को ऐसे विशेषताओं के साथ डिजाइन करना चाहिए जो संक्रामक रोगों के जोखिम को कम करें। बाड़ लगाना एक उदाहरण है। खेल के मैदानों के चारों ओर बाड़ लगाने से बच्चों के कीड़ों के संपर्क से बचाया जा सकता है। हम कुत्तों के लिए ऐसे इलाके भी बना सकते हैं जहां उन्हें बिना रस्सी के घूमने दिया जाए, ताकि वे मल या पेशाब से जमीन को गंदा न करें। खेल मैदानों के नीचे रेत के बजाय रबर लगाने से बिल्लियां उस जगह को अपना शौच की जगह कम ही बनाती हैं। हम पानी वाली जगहों पर शिकारी मछलियां भी डाल सकते हैं, जैसे कि आस्ट्रेलियन स्मेल्ट और पैसिफिक ब्लू आई। इससे मच्छरों की आबादी को काबू में रखने में मदद मिलेगी। ये मछलियां मच्छरों के अंडों व लार्वा को खा जाती हैं।

मनुष्यों की भूमिका: मनुष्य भी रोगाणुओं को फैलाते हैं। इनमें पालतू जानवरों के मल को न उठाना और खाद्य अपशिष्ट को सही तरीके से न निपटाना शामिल है। विशेष रूप से पक्षियों को खाना देना चिंता का विषय है। इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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