काशी में पतंग प्रतियोगिता: चौथी पतंग कटते ही गंगा के उस पार रेती पर गूंजा भक्काटे और हर हर महादेव…

बनारस काइट क्लब विपक्षी टीम फायर क्लब की चार पतंगें काटकर पतंग प्रतियोगिता का चैंपियन बना। नगर निगम की ओर से मंगलवार को दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा पार रेती पर पतंग प्रतियोगिता हुई। इसमें दो दिनों से जारी रंग-बिरंगी पतंगों की आसमानी जंग के फाइनल में बनारस काइट क्लब ने फायर काइट क्लब को 4-0 से शिकस्त दी। चौथी पतंग कटते ही गंगा पार भक्काटे और हर हर महादेव… का नारा गूंज उठा। सेमीफाइनल और फाइनल के रोमांचक मुकाबलों में पतंगबाजों ने शानदार पेच दिखाए। दूसरे दिन पहले दौर में सेमीफाइनल के मुकाबले हुए। पहले सेमीफाइनल में बनारस काइट क्लब ने अपनी सधी हुई डोर और कलाबाजी से एयरलाइंस काइट क्लब को बाहर का रास्ता दिखाया।

वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में फायर काइट क्लब और स्काई लाइन काइट क्लब के बीच कांटे की टक्कर हुई। इसमें हवा के रुख का सही अंदाजा लगाते हुए फायर काइट क्लब ने फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में बनारस काइट क्लब के बंटी और शुभम की जोड़ी के आगे प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं सके। अपनी महारत का लोहा मनवाते हुए बनारस क्लब ने फायर काइट क्लब की पतंगों को एक के बाद एक चार बार काटकर खिताब जीता।

विजेताओं को मेयर ने पुरस्कार देकर किया सम्मानित
पतंग प्रतियोगिता के समापन पर मंगलवार को मेयर अशोक कुमार तिवारी ने विजेताओं को शील्ड देकर सम्मानित किया। इसमें बनारस काइट क्लब के बंटी और शुभम को प्रथम पुरस्कार, फायर काइट क्लब के समीर को द्वितीय पुरस्कार और एयरलाइंस काइट की टीम को तृतीय पुरस्कार पुरस्कार मिला। विजेता टीम को 51 हजार, द्वितीय को 21 हजार और तृतीय को 11 हजार रुपये पुरस्कार राशि बुधवार को नगर निगम कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में देने की घोषणा की।

उधर, विजेता टीम के शानदार प्रदर्शन पर आयोजन स्थल पर ही पार्षदों और समाजसेवियों ने नकद पुरस्कार दिए। पार्षद विजय द्विवेदी और अजय शंकर तिवारी गुड्डू ने टीम को 2500-2500 रुपये, शंभू निषाद ने 2100, अजय त्रिवेदी ने 2000, सत्यनारायण साहनी ने 1500, जगन्नाथ ओझा ने 1100 और सोमनाथ यादव ने 1000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। समापन समारोह में पार्षद राम गोपाल, इंद्रेश सिंह, सुशील गुप्ता, प्रवीन राय, श्रवण गुप्ता, अमरेश गुप्ता, भाजपा मंडल अध्यक्ष सोमनाथ यादव, जगरन्नाथ ओझा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

चूड़ा-मटर और गाजर के हलवे ने बढ़ाई गंगा पार रेती की रौनक
गंगा की रेती पर जहां एक ओर आसमान में पतंगों के बीच आसमानी युद्ध छिड़ा था वहीं दूसरी ओर ठंडी हवाओं के बीच प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए बनारसी चूड़ा-मटर और गरमा-गरम गाजर के हलवे का खास इंतजाम किया गया था। खिलाड़ियों ने पतंगबाजी के साथ-साथ गाजर के हलवे और चूड़ा-मटर का जमकर लुत्फ उठाया।

ये भी जानें
प्रथम पुरस्कार : बनारस काइट क्लब (बंटी और शुभम)
द्वितीय पुरस्कार : फायर काइट क्लब (समीर और बाले)
तृतीय पुरस्कार : एयरलाइंस काइट क्लब (वॉकओवर)

अगले साल पतंगबाजी का महाकुंभ बनेगा नेशनल इवेंट: मेयर
पतंग प्रतियोगिता के समापन पर मेयर अशोक कुमार तिवारी ने घोषणा की कि काशी की पतंगबाजी की परंपरा को हम वैश्विक पटल पर ले जाएंगे। अगले वर्ष से यह आयोजन नेशनल इवेंट बनेगा। युवा रील की आभासी दुनिया छोड़ मैदान के रोमांच से जुड़ें, इसके लिए हम पुरस्कार राशि में दस गुना वृद्धि कर रहे हैं। प्रथम विजेता को पांच लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 2.51 लाख रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को 1.51 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि इस पहल से काशी की पुरातन खेल संस्कृति को नई ऊंचाई मिलेगी।

मोबाइल के चक्कर में अपनी जड़ों को न भूलें युवा: उपसभापति
नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास ने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, तकनीक और मोबाइल के इस दौर ने हमारे पारंपरिक खेलों को हाशिये पर धकेल दिया है। आज का युवा मैदान की ताजी हवा और पतंगबाजी जैसे रोमांचक खेलों के बजाय बंद कमरों में स्क्रीन पर समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहा है। यह न केवल हमारी शारीरिक सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत भी विलुप्त हो रही है। पतंगबाजी जैसे आयोजन हमें फिर से मैदानों की ओर लौटने और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देते हैं। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए इन पारंपरिक खेलों को सहेज कर रखना होगा।

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