Ayodhya Case : सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफ़र अहमद ने कहा- हमने अपील वापस लेने का हलफनामा नहीं दिया

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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अपना दावा छोडऩे की उड़ती खबरों को अध्यक्ष जुफ़र अहमद फारुखी ने खारिज किया है। उन्होंने इस तरह की खबर को अफवाह बताया है।

सुन्नी वकफ बोर्ड के अध्यक्ष जुफ़र अहमद फारुखी ने गुरुवार को दैनिक जागरण से कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड ने अपील वापस लेने का कोई हलफनामा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि हमने मध्यस्थता पैनल को जरूर सेटेलमेंट का एक प्रपोजल दिया है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के 18 सितंबर के फैसले के तहत इसे कॉन्फिडेंशियल रखा जाना है। इसी कारण इसमें हमने क्या प्रपोजल दिया है यह नहीं बता सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह हमें मान्य होगा।

इससे पहले अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा छोडऩे संबंधी किसी तरह के नए हलफनामा देने से इंकार किया। उनका कहना है कि बोर्ड की ओर से कोई हलफनामा पेश नहीं किया गया है। कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं। 

ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (एआईबीएमएसी) के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा है कि उन्हें सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा अपील वापस लेने की कोई जानकारी नहीं है। वहीं अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुलह-समझौता कमेटी में सदस्य नामित किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को हलफनामा देकर सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की ओर से दावा छोडऩे की बात सामने आई है, लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कुछ भी दायर नहीं हुआ है, यह अफवाह है। हम सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में बुधवार को खबर आई कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मामले में दायर केस को वापस लेने का फैसला किया है। इस बाबत वक्फ बोर्ड ने मध्यस्थता पैनल के जरिये इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। बताया जा रहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने हलफनामा दाखिल करने से पहले अपने वकीलों से सलाह-मशविरा भी नहीं किया। हलफनामे में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह अपना केस वापस लेना चाहता। हलफनामा श्रीराम पंचू की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया।

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