तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को पनाह दे रहा है पाकिस्तान: अमेरिका

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अमेरिका के सेना प्रमुख ने कहा है कि तालिबान, हक्कानी नेटवर्क को अभी भी पाकिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध है और अगर पाकिस्तान अपनी जमीन पर इसी तरह आतंकवाद को शरण देता रहा तो अफगानिस्तान में आंतकवाद पर लगाम लगाना मुश्किल होगा. अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मार्क ए मिली ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान सांसदों को यह जानकारी दी. पिछले साल अगस्त में अपनी नई दक्षिण एशिया नीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करने पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़े प्रावधान का आह्वान किया था.

अमेरिका ने आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकामी पर पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता के रूप में करीब दो अरब डॉलर की मदद रोक दी थी. सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आंतकवाद को खत्म करने के लिए आंतकवाद के खतरे को कम करना होगा जिसे आंतरिक सुरक्षा बल नियमित रूप से कर सकते हैं.

जनरल मिली ने कहा, ‘‘ऐसे किसी आतंकवाद को मिटाना बहुत मुश्किल है जिसे किसी अन्य देश में सुरक्षित पनाहगाह हासिल हो. इस समय तालिबान, हक्कानी तथा अन्य संगठन ऐसा ही कर रहे हैं. वास्तव में इनके पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने हैं. पाकिस्तान को समाधान का हिस्सा बनना होगा.’’जनरल मिली ने कहा कि समाधान में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है. मिली ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान समाधान का हिस्सा है. यह क्षेत्रीय समाधान है. यह पाकिस्तान को शामिल करने वाली क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा है.’’

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मेल-जोल के संबंध में प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने कहा अफगानिस्तान सरकार अलग-अलग विपक्षी गुटों के साथ मिल कर एक तरह की राजनीतिक सुलह करने की अब सही दिशा पर चल रही है. अमेरिका इस कोशिश का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में सैनिकों की मौजूदगी अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है. मिली ने उम्मीद जताई कि अफगान सेना, पुलिस, खुफिया बल व अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ हिंसक खतरे से निपट सकती है.

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