यहां इंसानों और सांंपों के बीच है अनोखा रिश्ता, वो डसते नहीं, ये मारते नहीं

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देखने में आता है कि जब पशु-पक्षी व इंसान एक-दूसरे की भावनाओं को समझने लगते हैं तो फिर वे एक-दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाते। ग्राम डिघारी में तो सर्पों व इंसानों के बीच यह रिश्ता दिखलाई पड़ता है। ग्रामवासियों के अनुसार इस गांव में न तो कोई सर्प किसी इंसान को काटता है और न ही कोई इंसान किसी सर्प को मारता है। एक किवदंती के चलते बने इस जज्बाती रिश्ते को झुठलाने का प्रयास दोनों में से किसी पक्ष ने अब तक नहीं किया है।

इसी रिश्ते को अटूट व यादगार बनाए रखने डिघारी के ग्रामीण नागपंचमी के दिन अपना समस्त कार्य स्थगित रख सन 2008 में निर्मित नाग मंदिर में सामूहिक पूजापाठ कर सर्पदेवों के प्रति अपनी श्रद्धा व आस्था व्यक्त करते हैं जो सोमवार को नागपंचमी के अवसर पर किया जाएगा। आरंग विकासखंड के ग्राम डिघारी (टेकारी) में तकरीबन 15 सौ की आबादी है।। इस ग्राम की कई पीढियां गुजर गई पर आज तक सर्पों द्वारा किसी इंसान को काटने अथवा किसी इंसान द्वारा किसी सर्प को नुकसान पहुंचाए जाने की शिकायत नहीं मिली है।

इस ग्राम में प्रचलित एक किवदंती के अनुसार सदियों पहले ग्राम के एक ब्राह्मण परिवार के पोहकल नामक धार्मिक व्यक्ति को एक रात्रि स्वप्न में एक सर्प ने दर्शन दे मुंह में कांटा गड़ने व इसकी वजह से दर्द से व्याकुल होने की बात कह कांटा निकालने का आग्रह किया। नींद टूटने पर उन्होंने तुलसी चौरा पर दर्द से व्याकुल एक नाग को बैठे पाया। डर की वजह से पहले तो वह पास जाने से हिचकता रहा पर अंतत: अनहोनी का भय त्याग सर्प के मुंह में हाथ डाल कांटा को निकाल फेंका।

किवदंती के अनुसार तब नागराज ने डिघारी के सीमारेखा के भीतर सर्पों द्वारा किसी को भी न डसने का वरदान दिया। इस घटना की जानकारी ग्रामीणों को देने पर तबके भक्तिमय माहौल मे ग्रामीणों ने सर्पों को मारना छोड़ पूजना शुरू कर दिया और सर्पों ने डसना बंद कर दिया। कालांतर मे यह विश्वास का रिश्ता इतना मजबूत हो चला कि अब तो ग्राम के नौनिहाल भी निकल आने वाले सर्पों को अपने ग्राम की सीमारेखा के बाहर छोड़ आते हैं।

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