रामगोपाल यादव ने कहा- तब हम संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत योगी सरकार को करेंगे बर्खास्त

सम्भल। समाजवादी पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि वर्ष 2019 का चुनाव महत्वपूर्ण है। यह चुनाव ही देश की नई तकदीर लिखेगा। यदि यूपी से सर्वाधिक सीटें सपा और बसपा गठबंधन ने जीती तो देश का पीएम भी सपा ही तय करेगी। तब प्रदेश की भाजपा सरकार को 2022 के चुनाव का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हम संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत योगी सरकार को बर्खास्त करेंगे और प्रदेश में चुनाव होगा जिसमें सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।

फूलपुर-गोरखपुर की हार विपक्ष मजबूत 

रामगोपाल ने कहा कि फूलपुर और गोरखपुर की हार से भले ही भाजपा को कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन  देश में विपक्ष मजबूत हुआ है। चंद्रबाबू नायडू ने सरकार से समर्थन वापस लिया तो कर्नाटक के चुनाव में कांग्रेस की जीत में भाजपा की यह हार मददगार होगी। विपक्ष एकजुट हो चुका है। सम्भल से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके प्रोफेसर राम गोपाल ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ही हमारी उम्मीदवारी पर ग्रीन सिग्नल देंगे। उनके साथ सांसद बदायूं धर्मेंद्र यादव ने भी प्रोफेसर राम गोपाल के चुनाव लड़ने से आसपास की सीटों पर भी असर पड़ने की बात कही। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हम सम्भल ही नहीं बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा और बुलंदशहर तक में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

क्या है संविधान का अनुच्छेद 356 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 केंद्र सरकार को किसी राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति उस अवस्था में देता है जब राज्य का संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो गया हो। यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति की दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है। 

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अनुच्छेद 356 का प्रयोग दुरुपयोग

1950 में भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से केन्द्र सरकार द्वारा इसका प्रयोग करीब 100 बार किया जा चुका है। इस अनुच्छेद को पहली बार 31 जुलाई 1957 में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई केरल की कम्युनिस्ट सरकार बर्खास्त करने के लिए किया गया था। बाबरी विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश की भाजपा की राज्य सरकार बर्खास्त करने में भी इसका प्रयोग किया गया था।

सपाइयों को दिखाए काले झंडे

सपा के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल के आने से पहले ज़िला मुख्यालय संघर्ष समिति के सदस्यों ने सपाइयों को काले झंडे दिखाए।

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