पाक ने मांगी सिंधु नदी घाटी परियोजना के निरीक्षण की अनुमति

नई दिल्ली (प्रेट्र)। पाकिस्तान ने भारत से अपने अधिकारियों को सिंधु नदी घाटी में भारतीय परियोजना का निरीक्षण करने की अनुमति देने को कहा है। नई दिल्ली में स्थायी सिंधु आयोग की दो दिवसीय बैठक में पाकिस्तान ने यह आग्रह किया। भारत ने कहा है कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार वह व्यवस्था करेगा। इस आशय की जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों ने दी।

2014 में घाटी में आए थे पाक अधिकारी

पिछली बार पाकिस्तानी टीम के अधिकारियों ने 2014 में भारत में सिंधु नदी घाटी का दौरा किया था। आयोग की 14वीं बैठक के दौरान भारत की दो पनबिजली परियोजनाओं पाकल दल और लोअर कलनाई पर दोनों देश अपनी-अपनी स्थिति पर अटके रहे। ये दोनों परियोजनाएं जम्मू एवं कश्मीर में हैं।

सिंधु संधि का उल्‍लंघन: पाक

उल्‍लेखनीय है कि सिंधु की सहायक नदी चिनाब की घाटी पर भारत की दो परियोजनाएं हैं। इसके तहत पाकल दुल में 1000 मेगावाट व लोअर कालनई में 48 मेगावाट जलविद्युत बनेगी। पाकिस्तान की ओर से इन परियोजनाओं के लिए बांध निर्माण को सिंधु संधि का उल्लंघन बताया जाता है। जबकि 1960 में हुई सिंधु जल बंटवारा संधि के तहत भारत इन परियोजनाओं के डिजाइन को सही कहता है।

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अब तक दोनों देशों के 118 दौरे

दोनों देश एक-दूसरे के यहां की स्थिति जानने के लिए इस संधि के तहत निरीक्षण करते रहते हैँ। अब तक दोनों देशों ने 118 दौरे किए हैं जिसमें भारत में पाक ने 70 बार और पाक में भारत ने 48 दौरे किए। 2014 में आखिरी बार पाकिस्तान के अधिकारियों ने सिंधु नदी घाटी की जांच की थी। दोनों देश साल में कम से कम एक बार स्थायी सिंधु आयोग की बैठक में वार्ता करते हैं। पिछली बार मार्च 2017 में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बैठक आयोजित की गई थी।

कुल छ: नदियों पर संधि

कुल छ: नदियों- ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चिनाब और झेलम के जल बंटवारे पर संधि किया गया है। पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी इसके जरिए पाकिस्तान के लिए संरक्षित होता है। वहीं पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत के लिए संरक्षित होता है।

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