2019 में राज्यसभा चुनाव का कितना असर पड़ेगा, क्या बन पाएगा SP-BSP का गठबंधन?

गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव में सपा-बसपा को जीत का फॉर्मूला भी मिल गया है. 1993 में राममंदिर आंदोलन की लहर को सपा-बसपा ने मिलकर रोका था. तब दोनों दलों ने साझी सरकार बनाई थी. एक बार फिर दोनों मोदी लहर को रोकने के लिए एक जुट होने की कोशिश में हैं. राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार की हार से दोनों दलों की दोस्ती पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता नजर आ रहा है.

बसपा नेता सैय्सद कासिम ने कहा, बीजेपी ने राज्यसभा के 9वें उम्मीदवार को जिताने के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए हैं. उसे देखकर कौन कहेगा कि बीजेपी की जीत हुई है. बसपा उम्मीदवार को बीजेपी के प्रत्याशी से ज्यादा वोट मिले हैं. लेकिन द्वितीय वरीयता के आधार पर बीजेपी को जीत मिली है. ऐसे में नैतिक जीत बसपा की हुई है.

सूत्रों के मुताबिक अभी दोनों दलों में 2019 के लिए गठबंधन की कोई बात नहीं हुई. ऐसे में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के लिहाज से अभी से सपा-बसपा गठबंधन की बात करना उचित नहीं है. ये वक्त पर तय होगा, लेकिन एक बात साफ है कि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेगे तो बीजेपी को यूपी में मुश्किलों का सामना करना पड़ जाएगा. 2019 में मोदी के अभियान को भी तगड़ा झटका लग सकता है.

बताने की जरूरत नहीं कि सूबे में सपा-बसपा दोनों ऐसी पार्टियां हैं, जिनके पास एक मजबूत वोट बैंक है. ऐसे में दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो बीजेपी के लिए सूबे में 2014 जैसे नतीजे दोहराना बहुत मुश्किल हो जाएगा. यही वजह है कि बीजेपी के नेता सपा-बसपा की दोस्ती को लेकर तंज कर रहे हैं. राज्यसभा चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, सपा सिर्फ लेना जानती है, देना नहीं. सीएम योगी का ये बयान सपा-बसपा की दोस्ती में दरार डालने के लिए अहम भूमिका अदा कर सकता है.

गौरतलब है कि उपचुनाव नतीजों के बाद आजम खान ने कहा था कि  ‘अगर हम फिर बिछड़ जाएंगे तो फिर हार जाएंगे. यह गठबंधन लंबा चलेगा. एक दुश्मन ने हमें दोस्त बना दिया है. 2019 में सपा-बसपा गठबंधन करके चुनाव में उतरेंगे.

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