विधानसभा में गूंजा लुधियाना सामूहिक दुष्कर्म मामला, विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर दागे कई सवाल

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पंजाब सरकार कोशिश करेगी कि दुष्कर्म के मामलों का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में किया जाए। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा सदन में यह आश्वासन दिया कि वह खुद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मिलकर यह मुद्दा उठाएंगे। शून्य काल के दौरान सदन की उप नेता सरबजीत कौर माणुके ने लुधियाना में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला उठाते हुए सरकार पर हमला बोला।

एचएस फूलका ने कहा कि इस मामले में सरकार को जीरो टॉलरेंस दिखाना चाहिए। दोषी पुलिसकर्मी को सस्पेंड के बजाय डिसमिस किया जाए, ताकि सभी को सबक मिले। उन्होंने लुधियाना में नहर के किनारे सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग की। सिमरजीत बैंस ने कटाक्ष किया कि सीएम व्यस्त रहते हैं तो गृह विभाग किसी और को दे दें। सूबे में कानून व्यवस्था है ही नहीं। लुटेरे हफ्ता देते हैं, इसलिए पुलिस कार्रवाई नहीं करती है।

कुलतार संधवां ने कहा कि अगर कानून का डर होगा तो कोई ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेगा। पंजाब के लोग 2002-07 वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए पुलिस-प्रशासन को सख्त आदेश दें। विपक्ष के हमलों के बाद सीएम ने खुद कमान संभाली। उन्होंने पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के अलावा ऐसे घिनौने जुर्म के दोषियों को मिसाली सजा पर जोर दिया, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने सदन को बताया कि लुधियाना सामूहिक दुष्कर्म के छह में से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी भी जल्द पकड़ लिए जाएंगे।

कानून-व्यवस्था पर सरकार बहस को तैयार
आम आदमी पार्टी और लोक इंसाफ पार्टी के विधायकों द्वारा लुधियाना सामूहिक दुष्कर्म को लेकर सरकार पर तीखे हमलों के बाद सीएम ने खुद कानून-व्यवस्था पर उंगली उठाने वाले सिमरजीत बैंस और कुलतार संधवां को बहस की चुनौती दी। सीएम ने कहा कि पिछले दो साल में कानून-व्यवस्था की स्थिति में जितना सुधार हुआ है, कभी था ही नहीं।

टारगेटेड किलिंग के सात केस हल किए गए, गैंगस्टरों का सफाया किया गया। आप विधायकों ने कानून-व्यवस्था पर बहस की मांग की तो स्पीकर ने इंकार कर दिया। लेकिन सीएम ने फिर चुनौती दी कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।

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