धूप में कुछ देर बैठने से दूर होते हैं शरीर के कई रोग, फायदे और भी बहुत

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सूर्य की रोगनाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है तथा अपनी रश्मियों द्वारा सभी जीवों का स्वास्थ्य उत्तम रखता है। हमारे वेदों में सूर्य की पूजा को बहुत महत्व दिया गया है। प्राचीन ऋषि मुनियों ने सूर्य की शक्ति प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का संदेश मानव जाति को दिया था। कहा जाता है कि जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोगों के कीटाणु स्वतः मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों को फैलाता है। उन तत्वों के शरीर में प्रवेश करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।

पुराने समय में लोग सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार करके विटामिन-डी ले लेते थे, लेकिन वर्तमान समय में प्रचलित भारतीय पहनावे में शरीर का अधिकांश हिस्सा ढंका रहता है, जिस वजह से शरीर को विटामिन-डी नहीं मिल पाता। इसके अलावा सीटिंग जॉब, केबिन सिस्टम तथा एसी कार में आने-जाने की वजह से धूप नहीं मिल पाती। इस लाइफ स्टाइल में धूप में निकलने का मौका नहीं मिलता। हाल में एक रिसर्च में यह तथ्य सामने आया कि भारत में करीब 80 फीसदी लोगों में विटामिन-डी की कमी है। चिंता की बात यह है कि 90 फीसदी बच्चों में भी विटामिन-डी की कमी पाई गई। अकेले दिल्ली में 90 से 97 फीसदी स्कूली बच्चों में (6-17 वर्ष की आयु के) विटामिन-डी की कमी पाई गई है, जबकि भारत दुनिया के ऐसे देशों में शामिल है, जहां सूर्य की पर्याप्त रोशनी आती है।

धूप रखती है स्वस्थ

हड्डियों को सही तरीके से पोषण न मिलने से वे कमजोर हो जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे गठिया तथा गाउट आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि सूर्य की रोशनी में बैठने से हड्डियां मजबूत होती हैं, क्योंकि धूप से हम शरीर के लिए आवश्यक 90 फीसदी विटामिन डी ले सकते हैं। सुबह की धूप में जो अल्ट्रावायलेट किरणें होती हैं वे शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं। हड्डियों तथा मांसपेशियों के मजबूत होने के कारण हड्डियों के कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें इम्यून सिस्टम की हाइपरएक्टिविटी को समाप्त करती हैं और सोरायसिस जैसी त्वचा की बीमारियों से भी बचाव करती हैं ।

सूर्य की किरणों से व्यक्ति दिमागी रूप से स्वस्थ रहता है। धूप मनोविदलता नामक बीमारी के खतरे को कम करती है। धूप मेटाबॉलिज्म को सुधारती है, जिससे मधुमेह तथा हृदय रोग काबू में रहते हैं। धूप के कारण खून जमने, डायबीटिज तथा ट्यूमर जैसी बीमारियां पास नहीं फटकती तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति में इजाफा होता है। ताजा शोध के अनुसार सूर्य के प्रकाश और बीएमआई के बीच अच्छा संबंध होता है। इसलिए रोजाना थोड़ी देर की धूप से आपका वजन कंट्रोल में रहता है। यह एक प्राकृतिक अलाव है, जो ठंड के मौसम में आपको गर्म रखेगा। इस शोध में कहा गया है कि सुबह की 20-30 मिनट की धूप लेने से बॉडी क्लॉक ठीक रहता है। रात की बेहतर नींद के लिए भी सूर्य की रोशनी लाभदायक है। धूप में मेलाटेनिन नाम का हार्मोन विकसित होता है, जिससे रात को गहरी नींद आती है।

अवसाद से बचाता है

पश्चिमी देशों में जहां बर्फबारी होती रहती है, वहां धूप तो कभी-कभी ही देखने को मिलती है, इसलिए वहां लोगों में निराशा, एकाकीपन, अरूचि तथा नकारात्मक भावना देखने को मिलती है। चिकित्सकों के अनुसार, सर्दियों में विंटर लूज नाम से जानी जाने वाली यह समस्या उत्तर-भारत में अधिक देखने को मिलती है। स्वीडन के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हाकन ओलसन के मुताबिक, धूप स्नान से पैरों में खून के थक्के जमने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता। इस बीमारी के कारण ब्रिटेन में ही हर वर्ष 25 हजार लोगों की जान चली जाती है।

इस तरह के थक्के जमने का खतरा सर्दियों में अधिक होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि धूप में पाई जाने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें लोगों में फील गुड की भावना पैदा करती है। मनुष्य के अलावा पौधा तथा जीव-जन्तुओं के जीवन के लिए भी सूर्य की रोशनी बहुत जरूरी है। धूप की किरणों से वनस्पति, फूल एवं पत्ते आदि भी खिल-खिल जाते हैं। इसी तरह गायों के दूध पर भी धूप का प्रभाव पड़ता है। जिन गायों को घरों के भीतर बांधकर रखा जाता है, उनके दूध में विटामिन डी का अभाव होता है। इसके विपरीत जो गायें दिनभर मैदानों में घूमती हुई चरती रहती हैं, उनके दूध में विटामिन-डी की मात्रा पर्याप्त रहती है।

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