देश की भाषाओं को बचाना चाहता है संघ

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित हुआ प्रस्ताव

लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने देश मे प्रचलित विभिन्न भाषाओं और बोलियों के संरक्षण और संवर्धन का प्रस्ताव पास किया है । पत्रकार वार्ता में संघ के अवध प्रान्त के सह प्रान्त कार्यवाह प्रशांत भाटिया ने बताया कि नौ से 11 मार्च तक नागपुर में हुए कार्यक्रमों में 1538 प्रतिनिधियों में से 1461 प्रतिनिधि शामिल हुए थे । इसमें अवध प्रान्त से 48 प्रतिनिधि शामिल हुए थे । इस मौके पर अवध प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ अशोक दुबे भी उपस्थित रहे ।

सरकार से बढ़ावा देने की मांग

सह प्रान्त कार्यवाह प्रशांत भाटिया ने बताया कि देश मे प्रचलित विभिन्न भाषाओं और बोलियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिनिधियों द्वारा जो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया है । उसमें विलुप्त हो रही भाषाओं को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से मांग की गई है कि सभी कामकाज में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाए । प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाए । प्रतियोगी परीक्षाओं में मातृभाषा एक वैकल्पिक भाषा हो और तकनीकी शिक्षा को भी भारतीय भाषाओं में दिया जाना चाहिए । श्री भाटिया ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आज देश की अनेक भाषाएं और बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है । इसलिए देश की विविध भाषाओं एवं बोलियों के संरक्षण व संवर्धन के समुचित प्रयास किया जाना आवश्यक है ।

40 बोलियां विलुप्त होने की कगार पर

पत्रिका के एक लेख का हवाला देते हुए श्री भाटिया ने कहा कि भारत की 40 बोलियां विलुप्त होने की कगार पर हैं । भारत में 197 भारतीय भाषाएं और बोलियां संकट की स्थिति में हैं । श्री भाटिया ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में 250 भाषाएं या बोलियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं । उन्होंने कहा कि 2004 में हुए एक वैश्विक आंकलन के अनुसार साल 2050 तक वर्तमान में प्रचलित 90 फीसद भाषाएं और बोलियां विलुप्त हो सकती हैं । आंकलन में यह अनुमान लगाया गया है कि प्रतिवर्ष 10 भाषाएं अथवा बोलियां विलुप्त हो सकती हैं । उन्होंने कहा कि आज विश्व में 6,000 भाषाएं और बोलियां बोली जा रही हैं जिनमें से आधे अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत हैं । यह भी अनुमान है कि मानव सभ्यता के इतिहास में 30,000 भाषाएं विलुप्त हो चुकी हैं 
आरएसएस करता है सभी भाषाओं का सम्मान

श्री भाटिया ने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बहुविध ज्ञान को अर्जित करने के लिए विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने की समर्थक है । लेकिन भारत जैसे बहुभाषी देश में हमारी संस्कृति की संवाहक सभी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को परम आवश्यक मानती है । प्रतिनिधि सभा ने सरकारों, स्वैच्छिक संगठनों, जनसंचार माध्यमों, पंथ संप्रदायों के संगठनों, शिक्षण संस्थानों व प्रबुद्धजनों सहित संपूर्ण समाज से आग्रह किया है कि दैनिक जीवन में भारतीय भाषाओं के उपयोग एवं उनके व्याकरण, शब्द चयन, लिपि आदि में परिशुद्धता सुनिश्चित करते हुए उनके संवर्धन का हर संभव प्रयास करें 

अरब देशों में भी चल रहीं संघ की शाखाएं

संघ शाखाओं में पूरे देश के साथ ही अवध प्रान्त में हो रही वृद्धि पर भी प्रकाश डालते हुए संघ के अवध प्रान्त के सह प्रान्त कार्यवाह प्रशांत भाटिया ने कहा कि देश भर में इस समय 58,962 तथा अवध प्रांत में 1,308 दैनिक शाखाएं चल रही हैं, जबकि भारत के अतिरिक्त विश्व के अन्य 41 देशों में 1,199 शाखाएं चल रही हैं जिसमें अरब के छह देशों में भी 511 शाखाएं चलतीं हैं 

Loading...
E-Paper