लोकसभा चुनाव की पहली दहाड़ का भोपू बना सोशल मीडिया

मीडिया तो हाथी के दिखाने के दांतों की तरह इस्तेमाल होगा, देर तक चबाने वाले दांतों जैसी सोशल मीडिया के मुंह में सियासत अपने प्रचार की असली खुराक डालेगी। बेचारे पेशेवर पत्रकारों को इस बात का अहसास तब हुआ जब सपा-बसपा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का आमंत्रण उनके हाथ बहुत बाद आया पहले सोशल मीडिया पर नजर आया।

बुआ-बबुआ ने लोकसभा चुनाव की यलग़ार कर दी। आगामी चुनाव में यूपी की भूमिका सबसे अहम है और यूपी में सपा-बसपा गठबंधन पर सबकी निगाहें हैं। होटल ताज में एक प्रेस कांफ्रेंस में माया-अखिलेश गठबंधन की घोषणा करेंगे। ये चर्चाएं कांप्रेंस के 24 घंटे पहले हवा में तैरने लगीं। कैसे! प्रेस कांफ्रेंस का आमंत्रण सोशल मीडिया में वायरल होने से। बस अब इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि आगामी लोकसभा चुनाव में मौजूदा राजनीतिक दल किस हद तक सोशल मीडिया को अपने प्रचार का हथियार बनायेंगे।

गठबंधन की घोषणा वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिरकत के लिए देशभर के दिग्गज पत्रकारों ने लखनऊ में डेरा डाल दिया। तमाम बड़े अखबारों और चैनलों के स्थानीय पत्रकारों को मिलाकर दो सौ से अधिक आमंत्रित पत्रकार इस बड़ी सियासी प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होंगे। किन्तु सोशल मीडिया में वायरल आमंत्रण पत्र को देखकर दो-तीन सौ छुट्टा पत्रकार भी इस एतिहासिक प्रेस वार्ता में जरूर दाखिल होंगे। यानी दोपहर बारह बजे लखनऊ के होटल ताज में एक छोटी-मोटी रैली का मंजर होगा। और यही सपा-बसपा के बीच सामंजस्य की पहली परीक्षा शुरू हो जायेगी। सोशल मीडिया को प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम बनाने के लिए इन पार्टियों ने मीडिया आमंत्रण को सोशल मीडिया पर वायरल कर तो दिया लेकिन यहां इकट्ठा कथित पत्रकारों की संभावित पांच-सात सौ लोगों की भीड़ पर कैसे काबू किया जायेगा।

मीडिया को लेकर सपा और बसपा दोनों के अलग अलग रवैये रहे हैं। सपा में किसी भी कांफ्रेंस में किसी को भी दाखिल होने की खुली आजादी रही है लेकिन बसपा सुप्रीमो की प्रेस वार्ता में मीडिया कर्मियों के कार्ड चैक होने से लेकर पत्रकारों के जूते चप्पलें तक उतारे जा चुके हैं।

कल इन दोनों दलों के मिलन की बेला के ऐतिहासिक क्षणों में बिन बुलाये बारातियों से निपटने या इनके स्वागत के लिए समाजवादी स्वागत होता है या बसपावादी अनुशासन की सख्तिया पेश होती है। ये भी खबर के पीछे की खबर होगी।
-नवेद शिकोह
8090180256

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