चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल पर करीबी नजर बनाए हुए है अमेरिका

वॉशिंगटन : अमेरिका का कहना है कि मजबूत संस्थान किसी भी व्यक्तिगत नेता से अधिक महत्पवूर्ण है और वह चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के राष्ट्रपति कार्यकाल की सीमा समाप्त करने के कदम पर बहुत करीब से नजर बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम चीन में जारी गतिविधियों और कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकाल समाप्त करने के कदम पर नजदीकी नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि मजबूत संस्थान किसी भी व्यक्तिगत नेता से अधिक महत्वपूर्ण है.  

संविधान में संशोधन करने का पेश हुआ था प्रस्ताव
गौरतलब है कि चीन में वर्ष 1949 से सत्ता पर अधिकार करने वाले सीपीसी ने 25 फरवरी को देश के संविधान से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दो कार्यकाल की सीमा समाप्त करने के लिए देश के संविधान में संशोधन करने का एक प्रस्ताव पेश किया था. प्रस्ताव पेश करने का उदेश्य था कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग आजीवन कार्यकाल में बने रह पाएं.

लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देना अमेरिका की विदेश नीति का मूल तत्व
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने कहा कि मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देना अमेरिका की विदेश नीति का एक मूल तत्व है. उन्होंने कहा कि यह एक स्थिर, सुरक्षित और सक्रिय समाज की महत्वपूर्ण नींव है. हीथर ने कहा कि अमेरिका, विश्व स्तर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानव गरिमा और समृद्धि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर मजबूती से कायम रहा है.  

आतंकी पनाहगाहें चीनी हितों के लिये बेहतर नहीं होंगी
अमेरिका अन्य क्षेत्रीय ताकतों के साथ काम करना चाह रहा है और इस मसले से निपटने में चीन एक अहम देश होगा. पाकिस्तान में आतंकी पनाहगाहें चीनी हितों के लिये बेहतर नहीं होंगी. अधिकारी ने रेखांकित किया कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्तों के लिए चीन अधिक मददगार भूमिका निभा रहा है. चीन इस संबंध में और सक्रिय भूमिका निभा रहा है. 

अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि वह इस कथनों से असहमत हैं कि चीन इस बात को लेकर पाकिस्तान को राजी करने में मददगार की भूमिका नहीं निभाएगा कि पनाहगाहों पर कार्रवाई उसके खुद के हित में है. अधिकारी ने बताया कि चीन स्थिर अफगानिस्तान की दिशा में भी काम कर रहा है. वह उन्हें इसी मुद्दे की तरफ लेकर जायेगा जो पाकिस्तान में आतंकी पनाहगाहों से संबंधित है. अधिकारी ने बताया कि चीन-पाकिस्तान रिश्ते पहले से ही बहुत मजबूत है और इन रिपोर्टों को लेकर बेफिक्र लगता है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को दो अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता को रोक दिया है जो इस्लामाबाद को बीजिंग के और करीब ला देगा. अधिकारी ने कहा कि रिश्ते पहले से ही बेहद मजबूत है. लेकिन हमें दिखता है कि पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और चीन के साथ मजबूत रिश्ते रखना उसके हित में है. यह एक मुद्दा है और दूसरा मुद्दा यह है कि चीन दक्षिण एशिया में आतंकवाद और चरमपंथ को लेकर भी चिंतित है.

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