पिघल रही है बर्फ, पाकिस्तान के मंत्री को WTO वार्ता के लिए दिल्ली आने का न्योता

हाल में कई बार नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान द्वारा सीजफायर के उल्लंघन के बावजूद एक अच्छी कूटनीतिक पहल करते हुए भारत ने वहां के वाणिज्य मंत्री परवेज मलिक को नई दिल्ली में होने जा रही WTO की मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. विश्व व्यापार संगठन की यह अनौपचारिक वार्ता 19-20 मार्च को होगी. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार भारत द्वारा अभी तक पाकिस्तान के साथ बेहद सख्त रवैए को देखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

 पिछले हफ्ते ही ग्लोबल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान ने आतंकवाद को राजकीय नीति के रूप में इस्तेमाल करना बंद नहीं किया, तो उसे अलग-थलग कर दिया जाएगा. वैसे भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले दरवाजे से पहले भी शांति की तमाम कोशिशें चलती रही हैं. इसके पहले पिछले साल दिसंबर में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों अजीत डोभाल और नसीर जुनेजा के बीच गोपनीय मुलाकात होने की खबरें आईं थीं. इंडियन एक्सप्रेस की ही एक अन्य खबर के अनुसार पाकिस्तान से एक चार सदस्यीय सुरक्षा और खुफिया टीम 31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच भारत आई थी, जिसमें वहां के आतंकवाद निरोध के महानिदेशक भी शामिल थे.

इसके पहले किसी पाकिस्तानी नेता का आना दिसंबर 2016 में संभाव हुआ था, जब वहां के विदेश मंत्रालय के सलाहकार सरताज अजीज अमृतसर में अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में शि‍रकत करने के लिए आए थे. पिछले साल पाकिस्तान में आयोजित सार्क सम्मेलन में भारत सहित कई देशों ने शामिल होने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद इस सम्मेलन को निरस्त ही कर देना पड़ा था. पठानकोट हमले के दो साल बीतने के बावजूद अब भारत अपनी पाकिस्तान नीति में बारीकी से काम करने की कोशिश कर रहा है. अखबार के अनुसार कूटनीतिक सूत्रों ने इस बात की भी पुष्ट‍ि की है कि दोनों देशों ने जेल में बंद एक-दूसरे के कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया है. सबसे पहले महिलाओं, मानसिक रूप से कमजोर लोगों और बच्चों को रिहा किया जाएगा. ऐसे करीब 50 ‘नाजुक’ कैदी दोनों देशों की जेलों में बहुत दयनीय दशा में हैं. 

नरम हुआ मोदी सरकार का रुख

ऐसा माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल के चौथे साल में कुछ लचीलापन अपना रही है और पाकिस्तान के बातचीत की कड़ी शर्तों को हटाने पर राजी हो गई है. इसके पहले कई बार भारत इस बात पर अड़ा था कि जब तक आतंकवाद जारी है और पाक में आतंक के सरगनाओं पर कार्रवाई नहीं होती, कोई बातचीत नहीं हो सकती.

पिछले शुक्रवार को ही विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर को तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन की शुरुआत के अवसर पर अफगान के राष्ट्रपति अशरफ घानी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति के बर्दिमुखमदेव के साथ देखा गया. इस पाइपलाइन को ‘पीस पाइपलाइन’ कहा जा रहा है, जिससे दक्ष‍िण एशिया में शांति को बढ़ावा मिलेगा.

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