धोनी का ‘टोटका’ भी ना आया काम, एक साल में ‘गुड ब्वॉय’ बन गया ‘बैड ब्वॉय’

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नई दिल्ली. महेन्द्र सिंह धोनी के बारे में कहा जाता है कि वो सिर्फ खेलते ही नहीं दूसरों को बेहतर खेलने के लिए मोटिवेट भी कर देते हैं. सेंचुरियन में धोनी की धमाकेदार पारी का गवाह पूरी दुनिया बनी. लेकिन, इसी मुकाबले में टीम इंडिया के गुड ब्वॉय यानी युजवेंद्र चहल वो नहीं कर पाए जैसा कमाल उन्होंने धोनी के अर्धशतक जड़ने के बाद ठीक एक साल पहले करके दिखाया था. 

फरवरी 2017 में बने सबसे किफायती

एक साल पहले यानी फरवरी 2017 में महेन्द्र सिंह धोनी ने जब अपने T20 करियर का पहला अर्धशतक जड़ा था तो उस मुकाबले में गुड ब्वॉय चहल T20 की इंटरनेशनल पिच पर भारत के सबसे सफल गेंदबाज होने का तमगा हासिल किया था. फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले उस मुकाबले में धोनी ने 56 रन बनाए थे और चहल ने 4 ओवर में 25 रन देकर 6 विकेट चटकाए थे.

फरवरी 2018 में साबित हुए सबसे महंगे

एक साल बाद यानी फरवरी 2018 में धोनी ने सेंचुरियन में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपने इंटरनेशनल T20 करियर का दूसरा अर्धशतक जड़ा. लेकिन, इस बार ये अर्धशतक चहल के लिए सफल टोटका साबित नहीं हो सका और वो टीम इंडिया के गुड ब्वॉय से बैड ब्वॉय बन गए. चहल ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन T20 में 4 ओवर में 64 रन दिए और विकेट भी नहीं ले पाए.

सेंचुरियन में चहल का प्रदर्शन इंटरनेशनल T20 में किसी भी भारतीय गेंदबाज का सबसे घटिया प्रदर्शन है. चहल से पहले ये रिकॉर्ड जोगिंदर शर्मा के नाम था जिन्होंने 2007 T20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ 57 रन लुटाए थे. यही नहीं, इंटरनेशनल T20 में चहल ने किसी स्पिनर के सबसे ज्यादा रन लुटाने के सनथ जयसूर्या के रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली है. जयसूर्या ने साल 2007 वर्ल्ड T20 में पाकिस्तान के खिलाफ जोहान्सबर्ग में खेले मैच में 64 रन दिए थे.

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छक्के खाने में भी कम नहीं हैं चहल

T20 क्रिकेट की इंटरनेशनल पिच पर सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले भारतीय गेंदबाज बनने के अलावा चहल सर्वाधिक छक्के खाने वाले भारतीय गेंदबाज बनकर भी उभरे. चहल को सेंचुरियन T20 में 7 छक्के पड़े जो कि एक भारतीय रिकॉर्ड है. वर्ल्ड क्रिकेट में सर्वाधिक छक्के खाने के मामले चहल 5वें नंबर पर हैं.

खास बात ये है कि पिछले एक हफ्ते में जिन गेंदबाजोंने इंटरनेशनल T20 में 64 रन लुटाए चहल उस क्लब का भी हिस्सा बन गए हैं. इनमें चहल के अलावा दो और नाम बेन व्हिलर और एंड्रयू टाई का है.

जीत और हार में बड़ा फैक्टर चहल

साउथ अफ्रीका दौरे पर भारत की दो हार में चहल का रोल कितना बड़ा फैक्टर रहा अब उसका अंदाजा जरा इन दो आंकड़ों से लगाईए. भारत के जीते हुए मुकाबलों में चहल का गेंदबाजी औसत जहां 14.56 का रहा और उन्हें सिर्फ 6 छक्के पड़े वहीं हारे हुए मैचों में उनका गेंदबाजी औसत बढ़कर 132 का हो गया और उन्हें कुल 13 छक्के पड़े. धोनी के अर्धशतक के बाद बेशक ये उम्मीद बढ़ी थी कि चहल एक साल पहले वाली कामयाबी फिर दोहराएंगे लेकिन वो कहते हैं इतिहास बार-बार दोहराए नहीं जाते. फरवरी 2018 में चहल ने इतिहास तो बनाया लेकिन वैसा नहीं जैसा उन्होंने फरवरी 2017 में बनाया था.

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