विधायक की हत्या के बाद अलर्ट जारी

- in छत्तीसगढ़, प्रदेश

आंध्र प्रदेश के अरकू क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा मौजूदा व पूर्व विधायक की दिन-दहाड़े गोली मारकर की गई हत्या के बाद सीमावर्ती बस्तर में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं क्षेत्र के विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की समीक्षा करने के आदेश जारी किए गए हैं।आंध्र प्रदेश के अरकू क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा मौजूदा व पूर्व विधायक की दिन-दहाड़े गोली मारकर की गई हत्या के बाद सीमावर्ती बस्तर में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं क्षेत्र के विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की समीक्षा करने के आदेश जारी किए गए हैं।  घटना की सूचना मिलते ही पीएचक्यू ने बस्तर समेत सभी नक्सल प्रभावित रेंज में अलर्ट जारी किया है। विधायक,सांसद समेत जेड प्लस, जेड व वाय श्रेणी के व्यक्तियों की सुरक्षा कड़ी किए जाने की खबर है। गौरतलब है कि बस्तर में झीरम कांड के बाद जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा चाक चौबंद की गई थी। उनके दौरा एवं आवास में भी चौबीस घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।   कोरबा : रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 9952 करोड़ के रेल कॉरिडोर का किया शिलान्यास यह भी पढ़ें  सिक्यूरिटी रिव्यू करने कहा गया  गौरतलब है कि संभाग में जनप्रतिनिधि हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहे हैंे। इस लिहाज से यहां के मंत्रियों, आयोग अध्यक्ष, दिवंगत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के परिजनों एवं कुछ जुडूम नेताओं को वाय, जेड व जेड प्लस श्रेणी सुरक्षा दी गई है। उनके प्रवास के दौरान फॉलो व पायलट वाहन समेत पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मी मौजूद होते हैं। वहीं आवास में भी राउंड द क्लॉक सिक्योरिटी की व्यवस्था है। आंध्र की घटना के बाद आईजी सुरक्षा द्वारा जारी दिशा-निर्देश में जन प्रतिनिधियों की सिक्योरिटी रिव्यू करने कहा गया है। साथ ही सुरक्षाकर्मियों को भी अलर्ट रहने की हिदायत दी गई है। क्षेत्रों में दौरा कार्यक्रम तथा अन्य प्रयोजन से होने वाले प्रवास की जानकारी सबंधित जिले के एसपी को आवश्यक रूप से दिए जाने के लिए भी जनप्रतिनिधियों को आग्रह पत्र भेजा जा रहा है।   मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म की कोशिश, छुड़ाने गए परिजन से मारपीट यह भी पढ़ें  चुनाव से पहले हिंसा की आशंका  विधानसभा चुनाव के पहले फिर एक बार बस्तर में हिंसा की आशंका जताई जा रही है। आंध्र की घटना ने बस्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों को नए सिरे से सुरक्षा उपाय करने व एहतियात बरतने का संकेत दे दिए हैं। गौरतलब है कि नक्सलियों ने 2018 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है।   आंध्र में विधायक की हत्या के बाद बस्तर में अलर्ट जारी यह भी पढ़ें  इससे ग्रामीण मतदाताओं के परेशान होने के साथ अधिकारियों के माथे पर भी पसीना आ रहा है। दक्षिण बस्तर के दर्जनों संवेदनशील मतदान केंद्रों को दूसरे गांवों में शिफ्ट करने का प्रस्ताव भी चुनाव आयोग को दिया गया है। करीब डेढ़ दशक पहले माओवादियों ने नारायणपुर से लगे अंतागढ़ विधानसभा के कुछ गांवों के लोगों को मतदान करने की सजा देते गांव से भगा दिया था।

घटना की सूचना मिलते ही पीएचक्यू ने बस्तर समेत सभी नक्सल प्रभावित रेंज में अलर्ट जारी किया है। विधायक,सांसद समेत जेड प्लस, जेड व वाय श्रेणी के व्यक्तियों की सुरक्षा कड़ी किए जाने की खबर है। गौरतलब है कि बस्तर में झीरम कांड के बाद जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा चाक चौबंद की गई थी। उनके दौरा एवं आवास में भी चौबीस घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।

सिक्यूरिटी रिव्यू करने कहा गया

गौरतलब है कि संभाग में जनप्रतिनिधि हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहे हैंे। इस लिहाज से यहां के मंत्रियों, आयोग अध्यक्ष, दिवंगत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के परिजनों एवं कुछ जुडूम नेताओं को वाय, जेड व जेड प्लस श्रेणी सुरक्षा दी गई है। उनके प्रवास के दौरान फॉलो व पायलट वाहन समेत पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मी मौजूद होते हैं। वहीं आवास में भी राउंड द क्लॉक सिक्योरिटी की व्यवस्था है। आंध्र की घटना के बाद आईजी सुरक्षा द्वारा जारी दिशा-निर्देश में जन प्रतिनिधियों की सिक्योरिटी रिव्यू करने कहा गया है। साथ ही सुरक्षाकर्मियों को भी अलर्ट रहने की हिदायत दी गई है। क्षेत्रों में दौरा कार्यक्रम तथा अन्य प्रयोजन से होने वाले प्रवास की जानकारी सबंधित जिले के एसपी को आवश्यक रूप से दिए जाने के लिए भी जनप्रतिनिधियों को आग्रह पत्र भेजा जा रहा है।

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चुनाव से पहले हिंसा की आशंका

विधानसभा चुनाव के पहले फिर एक बार बस्तर में हिंसा की आशंका जताई जा रही है। आंध्र की घटना ने बस्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों को नए सिरे से सुरक्षा उपाय करने व एहतियात बरतने का संकेत दे दिए हैं। गौरतलब है कि नक्सलियों ने 2018 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है।

इससे ग्रामीण मतदाताओं के परेशान होने के साथ अधिकारियों के माथे पर भी पसीना आ रहा है। दक्षिण बस्तर के दर्जनों संवेदनशील मतदान केंद्रों को दूसरे गांवों में शिफ्ट करने का प्रस्ताव भी चुनाव आयोग को दिया गया है। करीब डेढ़ दशक पहले माओवादियों ने नारायणपुर से लगे अंतागढ़ विधानसभा के कुछ गांवों के लोगों को मतदान करने की सजा देते गांव से भगा दिया था।

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