मानवेंद्र के बीजेपी छोड़ने से कांग्रेस को फायदा,पत्नी चित्रा लड़ेंगी चुनाव

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पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ने से राजस्थान में सीटों के लिहाज से सबसे बड़े क्षेत्र मारवाड़ में कांग्रेस को फायदा हो सकता है.पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ने से राजस्थान में सीटों के लिहाज से सबसे बड़े क्षेत्र मारवाड़ में कांग्रेस को फायदा हो सकता है.  शनिवार को बाड़मेर के पचपदरा में स्वाभिमान रैली में मानवेंद्र सिंह ने बीजेपी से अपने परिवार का 4 दशक का रिश्ता तोड़ते हुए कहा 'कमल का फूल, बड़ी भूल'. बता दें कि मानवेंद्र सिंह बाड़मेर की शिव सीट से विधायक हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी गौरव यात्रा के दौरान मारवाड़ की हर विधानसभा का दौरा किया था लेकिन शिव सीट पर उनकी कोई सभा नहीं रखी गई थी.  मानवेंद्र, लोकसभा और पत्नी चित्रा विधानसभा चुनाव लड़ेंगी  बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट के विधायक मानवेंद्र सिंह इस सीट से तीन बार 1998, 2004 और 2009 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. साल 1998 में मानवेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के सोनाराम चौधरी से शिकस्त खाई और 2004 के चुनावों में सोनाराम चौधरी को करारी शिकस्त दी. मानवेन्द्र 2009 में कांग्रेस के हरीश चौधरी से चुनाव हार गए थे. तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके मानवेंद्र सिंह संसदीय राजनीति करने के ज्यादा इच्छुक हैं. एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में मानवेंद्र ने कहा है कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. वहीं पिछले कुछ दिनों मानवेंद्र सिंह की पत्नी चित्रा सिंह शिव विधानसभा में काफी सक्रीय हैं, लिहाजा ऐसा माना जा रहा है कि चित्रा सिंह शिव विधानसभा से चुनाव लड़ सकती हैं.  कांग्रेस में शामिल होने की संभावना से नहीं किया इनकार  राजनीतिक हलकों में मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के कयास लगाए जा रहें हैं, हालांकि उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन यह भी कहा है कि अंतिम निर्णय जनता का होगा कि उन्हें क्या करना है. जनता की राय जानने के लिए मानवेंद्र यात्रा निकालकर नब्ज टटोलेंगे. बता दें कि शनिवार को उनकी स्वाभिमान रैली में कांग्रस के समर्थन में नारे भी लगे थें.  मारवाड़ में होगा फायदा  भले ही मानवेंद्र सिंह ने अभी कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा नहीं की हो लेकिन राजस्थान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानवेंद्र के इस कदम से कभी कांग्रेस का गढ़ रहे मारवाड़ में उसको फायदा होगा. क्योंकि राजपूत, मुस्लिम और उनसे जुड़े अन्य समुदाय कांग्रेस के साथ आएंगी.  उल्लेखनीय है कि मारवाड़ में जोधपुर संभाग के 6 जिले-बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, पाली, सिरोही की कुल 33 सीट और नागौर जिले की 10 सीटों को मिलाकर कुल 43 विधानसभा क्षेत्र हैं. कभी कांग्रेस का गढ़ रहे मारवाड़ में पिछले चुनाव में बीजेपी ने 39 सीट जीत कर इस गढ़ को ढहा दिया. कांग्रेस के खाते में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट समेत महज तीन सीट आई जबकि एक सीट पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया था.  राजपूत और उनसे जुड़ी अन्य जातियां बीजेपी से नाराज  मारवाड़ की कई विधानसभा सीटों पर परिणाम को प्रभावित करने में राजपूतों की बड़ी भूमिका है. साथ ही राजपूतों से जुड़े राजपुरोहित, चारण, प्रजापत और अन्य पिछड़ी जातियां भी कांग्रेस की तरफ रुख करेंगी. राजस्थान में बीजेपी के परंपरागत वोट राजपूतों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर नाराजगी, जसोल परिवार को अलग-थलग करना और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष न बनाने को लेकर और बढ़ गई है.  मारवाड़ क्षेत्र में राजपुरोहित अच्छी संख्या है जो एससी-एसटी एक्ट को लेकर स्थानीय बीजेपी के रुख से नाराज बताए जा रहें हैं. वहीं आनंदपाल के एनकाउंटर की वजह से रावणा राजपूत भी खासा नाराज हैं. इन समुदायों के मानवेंद्र सिंह की रैली में मौजूदगी ने बीजेपी चिंता और बढ़ा दी है.  जसोल परिवार की मुसलमानों में अच्छी पकड़  इसके साथ ही मानवेंद्र सिंह के इस कदम से कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम वोट भी उसकी तरफ रुख करेंगे. जासोल परिवार का बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र के मुसलमानों में अच्छी पकड़ है. इसी वजह से 2014 लोकसभा चुनाव में बाड़मेर सीट पर बीजेपी और जसवंत सिंह में सीधी लड़ाई होने के चलते कांग्रेस तीसरे स्थान पर चली गई थी. बाड़मेर लोकसभा सीट पर 20 प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं जो जसोल परिवार के समर्थक हैं. इसकी वजह यह है कि सीमावर्ती जिले में रहने वाले ज्यादातर मुस्लिम परिवारों के पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रिश्ते हैं.  इसलिए इन्हें सिंधी मुस्लिम भी कहते हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह हिंगलाज यात्रा के माध्यम से सिंधी मुसलमानों का दर्द समझा था. और उन्हें भारत की तरफ रहने वाले रिश्तेदारों से जोड़ने के लिए थार एक्सप्रेस भी चलवाई. जिसकी वजह से इस क्षेत्र के मुस्लिमों पर जसोल परिवार का खासा प्रभाव है.

शनिवार को बाड़मेर के पचपदरा में स्वाभिमान रैली में मानवेंद्र सिंह ने बीजेपी से अपने परिवार का 4 दशक का रिश्ता तोड़ते हुए कहा ‘कमल का फूल, बड़ी भूल’. बता दें कि मानवेंद्र सिंह बाड़मेर की शिव सीट से विधायक हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी गौरव यात्रा के दौरान मारवाड़ की हर विधानसभा का दौरा किया था लेकिन शिव सीट पर उनकी कोई सभा नहीं रखी गई थी.

मानवेंद्र, लोकसभा और पत्नी चित्रा विधानसभा चुनाव लड़ेंगी

बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट के विधायक मानवेंद्र सिंह इस सीट से तीन बार 1998, 2004 और 2009 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. साल 1998 में मानवेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के सोनाराम चौधरी से शिकस्त खाई और 2004 के चुनावों में सोनाराम चौधरी को करारी शिकस्त दी. मानवेन्द्र 2009 में कांग्रेस के हरीश चौधरी से चुनाव हार गए थे. तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके मानवेंद्र सिंह संसदीय राजनीति करने के ज्यादा इच्छुक हैं. एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में मानवेंद्र ने कहा है कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. वहीं पिछले कुछ दिनों मानवेंद्र सिंह की पत्नी चित्रा सिंह शिव विधानसभा में काफी सक्रीय हैं, लिहाजा ऐसा माना जा रहा है कि चित्रा सिंह शिव विधानसभा से चुनाव लड़ सकती हैं.

कांग्रेस में शामिल होने की संभावना से नहीं किया इनकार

राजनीतिक हलकों में मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के कयास लगाए जा रहें हैं, हालांकि उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन यह भी कहा है कि अंतिम निर्णय जनता का होगा कि उन्हें क्या करना है. जनता की राय जानने के लिए मानवेंद्र यात्रा निकालकर नब्ज टटोलेंगे. बता दें कि शनिवार को उनकी स्वाभिमान रैली में कांग्रस के समर्थन में नारे भी लगे थें.

मारवाड़ में होगा फायदा

भले ही मानवेंद्र सिंह ने अभी कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा नहीं की हो लेकिन राजस्थान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानवेंद्र के इस कदम से कभी कांग्रेस का गढ़ रहे मारवाड़ में उसको फायदा होगा. क्योंकि राजपूत, मुस्लिम और उनसे जुड़े अन्य समुदाय कांग्रेस के साथ आएंगी.

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उल्लेखनीय है कि मारवाड़ में जोधपुर संभाग के 6 जिले-बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, पाली, सिरोही की कुल 33 सीट और नागौर जिले की 10 सीटों को मिलाकर कुल 43 विधानसभा क्षेत्र हैं. कभी कांग्रेस का गढ़ रहे मारवाड़ में पिछले चुनाव में बीजेपी ने 39 सीट जीत कर इस गढ़ को ढहा दिया. कांग्रेस के खाते में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट समेत महज तीन सीट आई जबकि एक सीट पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया था.

राजपूत और उनसे जुड़ी अन्य जातियां बीजेपी से नाराज

मारवाड़ की कई विधानसभा सीटों पर परिणाम को प्रभावित करने में राजपूतों की बड़ी भूमिका है. साथ ही राजपूतों से जुड़े राजपुरोहित, चारण, प्रजापत और अन्य पिछड़ी जातियां भी कांग्रेस की तरफ रुख करेंगी. राजस्थान में बीजेपी के परंपरागत वोट राजपूतों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर नाराजगी, जसोल परिवार को अलग-थलग करना और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष न बनाने को लेकर और बढ़ गई है.

मारवाड़ क्षेत्र में राजपुरोहित अच्छी संख्या है जो एससी-एसटी एक्ट को लेकर स्थानीय बीजेपी के रुख से नाराज बताए जा रहें हैं. वहीं आनंदपाल के एनकाउंटर की वजह से रावणा राजपूत भी खासा नाराज हैं. इन समुदायों के मानवेंद्र सिंह की रैली में मौजूदगी ने बीजेपी चिंता और बढ़ा दी है.

जसोल परिवार की मुसलमानों में अच्छी पकड़

इसके साथ ही मानवेंद्र सिंह के इस कदम से कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम वोट भी उसकी तरफ रुख करेंगे. जासोल परिवार का बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र के मुसलमानों में अच्छी पकड़ है. इसी वजह से 2014 लोकसभा चुनाव में बाड़मेर सीट पर बीजेपी और जसवंत सिंह में सीधी लड़ाई होने के चलते कांग्रेस तीसरे स्थान पर चली गई थी. बाड़मेर लोकसभा सीट पर 20 प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं जो जसोल परिवार के समर्थक हैं. इसकी वजह यह है कि सीमावर्ती जिले में रहने वाले ज्यादातर मुस्लिम परिवारों के पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रिश्ते हैं.

इसलिए इन्हें सिंधी मुस्लिम भी कहते हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह हिंगलाज यात्रा के माध्यम से सिंधी मुसलमानों का दर्द समझा था. और उन्हें भारत की तरफ रहने वाले रिश्तेदारों से जोड़ने के लिए थार एक्सप्रेस भी चलवाई. जिसकी वजह से इस क्षेत्र के मुस्लिमों पर जसोल परिवार का खासा प्रभाव है. 

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