क्षमा प्रार्थना के मंत्र के साथ, ऐसे करें गणेश प्रतिमा का विसर्जन

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गणेश महोत्सव पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसके साथ ही अब समय आ रहा है, जब गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। 10 दिनों तक हमारे घरों में विराजित रहने के बाद अब उन्हें विसर्जित किया जाएगा। मगर, कई लोगों को शायद यह जानकारी नहीं होगी कि विसर्जन के लिए क्या किया जाए।गणेश महोत्सव पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसके साथ ही अब समय आ रहा है, जब गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। 10 दिनों तक हमारे घरों में विराजित रहने के बाद अब उन्हें विसर्जित किया जाएगा। मगर, कई लोगों को शायद यह जानकारी नहीं होगी कि विसर्जन के लिए क्या किया जाए।  सबसे पहले तो यह जान लें कि गणेशजी की विदाई की तैयारी वैसे ही करनी चाहिए जैसे घर से किसी व्यक्ति के यात्रा पर जाने के समय तैयारी की जाती है। सबसे पहले आरती और पूजन कर विशेष प्रसाद का भोग लगाएं।   क्षमा प्रार्थना के मंत्र के साथ, ऐसे करें गणेश प्रतिमा का विसर्जन यह भी पढ़ें  इसके बाद श्री गणेश का स्वस्तिवाचन करें। एक स्वच्छ पाटा लेकर उस पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर उस पर अक्षत रखें। इस पर एक साफ वस्त्र बिछाएं। पाटे के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें।  गणेश प्रतिमा को उनकी स्थापना वाले स्थान से जयकारा लगाते हुए उठाकर उन्हें इस पाटे पर विराजित करें। फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, लड्डू, मोदक रखें। इसके एक छोटी लकड़ी पर चावल, गेहूं, पंच मेवा की पोटली और यथाशक्ति दक्षिणा रखकर उसे बांधकर नदी या तालाब के विसर्जन स्थल तक ले जाएं।   राशिफल 21 सितंबर : वित्तीय पक्ष मजबूत होगा, सामाजिक सम्मान बढ़ेगा यह भी पढ़ें  विसर्जन से पहले गणेशजी की फिर से आरती करें। श्री गणेश से खुशी-खुशी बिदाई करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि का आशीर्वाद मांगे। साथ ही गणेश स्थापना से लेकर विसर्जन तक यदि जाने-अनजाने में कोई गलती हुई है, तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना भी करें।  इसके बाद गणेश प्रतिमा को पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं।   VIDEO: यहां लगी है मोदक देने वाली ATM मशीन, यूं मिलेगा प्रसाद यह भी पढ़ें  क्षमा प्रार्थना का मंत्र  ॐ आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।   राशिफल 20 सितंबर : व्यापार में होगा लाभ, व्यावसायिक यात्रा शुभ रहेगी यह भी पढ़ें  ॐ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में।  इसका अर्थ है कि मैं आपका आवाहन यानी बुलाने का तरीका नहीं जानता हूं और न ही आपको विसर्जित करना जानता हूं। पूजा की भी जानकारी मुझे नहीं है, हे परमेश्वर मुझे क्षमा करें। मैं मंत्र नहीं जानता हूं, किसी क्रिया की जानकारी भी नहीं है, हे ईश्वर मैं भक्तिहीन हूं। जिस तरह भी यथा शक्ति मैंने आपकी पूजा की है, उसे पूरी करें और प्रसन्न हों।

सबसे पहले तो यह जान लें कि गणेशजी की विदाई की तैयारी वैसे ही करनी चाहिए जैसे घर से किसी व्यक्ति के यात्रा पर जाने के समय तैयारी की जाती है। सबसे पहले आरती और पूजन कर विशेष प्रसाद का भोग लगाएं।

  श्री गणेश का स्वस्तिवाचन करें। एक स्वच्छ पाटा लेकर उस पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर उस पर अक्षत रखें। इस पर एक साफ वस्त्र बिछाएं। पाटे के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें।

गणेश प्रतिमा को उनकी स्थापना वाले स्थान से जयकारा लगाते हुए उठाकर उन्हें इस पाटे पर विराजित करें। फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, लड्डू, मोदक रखें। इसके एक छोटी लकड़ी पर चावल, गेहूं, पंच मेवा की पोटली और यथाशक्ति दक्षिणा रखकर उसे बांधकर नदी या तालाब के विसर्जन स्थल तक ले जाएं।

विसर्जन से पहले गणेशजी की फिर से आरती करें। श्री गणेश से खुशी-खुशी बिदाई करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि का आशीर्वाद मांगे। साथ ही गणेश स्थापना से लेकर विसर्जन तक यदि जाने-अनजाने में कोई गलती हुई है, तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना भी करें।

इसके बाद गणेश प्रतिमा को पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं।

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क्षमा प्रार्थना का मंत्र

ॐ आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।

ॐ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में।

इसका अर्थ है कि मैं आपका आवाहन यानी बुलाने का तरीका नहीं जानता हूं और न ही आपको विसर्जित करना जानता हूं। पूजा की भी जानकारी मुझे नहीं है, हे परमेश्वर मुझे क्षमा करें। मैं मंत्र नहीं जानता हूं, किसी क्रिया की जानकारी भी नहीं है, हे ईश्वर मैं भक्तिहीन हूं। जिस तरह भी यथा शक्ति मैंने आपकी पूजा की है, उसे पूरी करें और प्रसन्न हों।

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