‘राजनेता सिर्फ 5 साल, दूरदर्शी लेखक अगली पीढ़ी तक के लिए सोचता है’

नई दिल्ली: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि राजनेता सिर्फ पांच साल के लिए सोचता है, जबकि एक दूरदर्शी लेखक अगली पीढ़ी तक के लिए सोचता है. राज्यपाल ने साहित्य अकादमी के सभागार में प्रोफेसर अरुण कुमार भगत द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों ‘आपातकालीन पत्रकारिता की संघर्ष गाथा’ और ‘आपातकाल की कहानियां’ का लोकार्पण किया किया. राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों को यातनाएं झेलनी पड़ी थीं.

जेल यातनाओं की यादें दुख देती हैं. राज्यपाल ने कहा कि सम्पूर्णानन्द ने कहा था कि ये क्रांति अभी पूरी नहीं हुई है. उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों की चर्चा की और कहा कि आज जिस गुड गवर्नेंस की चर्चा चल रही है वो समाज के अंतिम व्यक्ति तक को महसूस होनी चाहिए. उसे ये एहसास होना चाहिए की सरकार उसकी है. राज्यपाल ने कहा कि 1975 में आपातकाल सत्ता सुख के लिए लगाया गया था.

प्रोफेसर अरुण कुमार भगत माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर के प्रभारी हैं. प्रोफेसर भगत की 15 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है. अरुण भगत ने कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से आपातकाल पर शोध कर रहे हैं. जब आपातकाल लगाया गया उस समय वह 10 वर्ष के थे. उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता एक शिक्षक थे जिनका वेतन आपातकाल के दौरान नसबंदी के लक्ष्य को पूरा न करने के कारण रोक दिया गया था.

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय संयोजक सुनील आंबेडकर ने कहा कि आपातकाल के समय वो भी प्राथमिक विद्यालय के ही छात्र थे और जो समझा उसके अनुसार उन्होंने आपातकाल की तुलना तानाशाही से की. लोगों को हमारे लोकतंत्र के काले हिस्से से परिचित होना चाहिए. आज की पीढ़ी को आपातकाल के बारे में जानना जरूरी है. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पूर्व कुलपति अचुत्यानंद मिश्र ने कहा कि मैंने आपतकाल को देखा है.

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