कैप्टन ने नहीं की केजरीवाल जैसी गलती, बोर्ड-निगम चैयरमैन बनाने से पहले बदला एक्‍ट

 पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जैसी गलती नहीं की। दिल्‍ली में बोर्ड आैर निगमों में पद के कारण आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की विधानसभा की सदस्‍यता पर तलवार लटक गई थी। पंजाब में कैप्‍टन सरकार ने इससे सबक लिया है। उसने बोर्ड-निगमों में नियुक्ति से पहले एक्‍ट में संशोधन कर इसे लाभ के पद के दायरे से बाहर कर दिया है। ऐसे में अब वह विधायकों को बोर्ड और निगमों का चैयरमैन बना सकेगी।

विधायकों को बोर्ड-निगम में लगाने को पहले ही कर दिया संशोधन, राज्यपाल की मोहर लगते ही होगी नियुक्ति

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस बात के संकेत दिए हैं कि कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज विधायकों को विधायकों को बोर्ड-निगमों में एडजस्ट किया जाएगा। दिल्ली के 20 विधायक लाभ के पद के कानूनी दायरे में फंस गए थे और उनकी विधानसभा की सदस्यता पर तलवार लटक गई थी।

कैबिनेट की बैठक में बुधवार को विधायकों के लिए लाभ के पद के नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी गई। अब इस पर राज्यपाल की मुहर लगनी बाकी है। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने वायदा किया था कि विधायकों को बोर्ड और निगमो में नहीं नियुक्‍त किया जाएगा। इस बारे में अब कैप्‍टन का कहना है, मैंने कभी यह नहीं कहा कि विधायकों को बोर्ड-कारपोरेशन में नहीं लगाया जाएगा। मैंने कहा था कि जो प्रत्याशी टिकट न मिलने के कारण चुनाव मैदान में हैं, वे बिना किसी शर्त के चुनाव मैदान से हट जाएंगे तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात की भी पुष्टि की कि कैबिनेट द्वारा पास प्रस्ताव पर राज्यपाल की मोहर लगने के साथ ही बोर्ड-कारपोरेशन में चेयरमैन लगाए जाने का क्रम शुरू हो जाएगा। सूत्र बताते हैं कि संभवत: अगले सप्ताह कांग्रेस सरकार बोर्ड और निगमों में नियुक्ति को लेकर पहली सूची जारी कर देगी। यही कारण है कि नाराज विधायकों ने पुन: अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैैं ताकि पार्टी उन्हें तवज्जो दे। काफी संख्या में चेयरमैन बनने के इच्छुक नेता अपनी-अपनी लॉबिंग में जुट गए हैं। 

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